लगातार दूसरी बार पदक, लेकिन इस बार रजत
दक्षिण कोरिया के ब्रेकिंग कलाकार किम होंगयोल, जिन्हें दुनिया भर में ‘होंगटेन’ के नाम से जाना जाता है, ने २०२६ के एइची-नागोया एशियाई खेलों में पुरुषों की स्पर्धा का रजत पदक जीता। फ़ाइनल में उन्हें जापान के २४ वर्षीय शिगेयूकी नाकाराई से ०-३ से हार मिली। इस नतीजे के साथ वह स्वर्ण पदक दोबारा नहीं जीत पाए, लेकिन एशियाई खेलों में लगातार दूसरी बार पदक अपने नाम करने में सफल रहे।
२०२२ के हांगझोऊ एशियाई खेलों में ब्रेकिंग को पहली बार पदक वाली स्पर्धा के रूप में शामिल किया गया था; वह प्रतियोगिता कोविड महामारी के कारण २०२३ में हुई थी। उस प्रतियोगिता में होंगटेन ने स्वर्ण जीता था। इस बार दूसरे स्थान पर रहने के बावजूद उनका प्रदर्शन एक असाधारण निरंतरता दिखाता है: नई पीढ़ी के तेज़ और ताकतवर खिलाड़ियों के बीच उन्होंने फिर साबित किया कि अनुभव और रचनात्मकता भी मुकाबले में बड़ी भूमिका निभाते हैं।
“मैं चाहता हूँ कि मेरी चुनौती किसी के लिए थोड़ी-सी हिम्मत और उम्मीद बन सके,” होंगटेन ने कहा।
उम्र से आगे निकलता उनका प्रदर्शन
ब्रेकिंग में नर्तक तेज़ ताल पर शरीर को घुमाते, संतुलन बनाते और ज़मीन पर जटिल चालें करते हैं। इसमें ताकत, लचक, गति और संगीत की समझ एक साथ चाहिए—मसलन, कुछ ही पलों में हाथों के सहारे घूमना और फिर ताल के साथ अगली चाल में सहजता से जाना। इसीलिए लंबे समय तक इस स्तर पर प्रतिस्पर्धा करना शरीर और मन, दोनों के लिए कठिन चुनौती है।
फ़ाइनल तक पहुँचते-पहुँचते होंगटेन को महसूस हुआ कि शरीर पहले की तरह साथ नहीं दे रहा और ऊर्जा भी कम पड़ रही थी। उन्होंने मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि काश वह पाँच साल छोटे होते। फिर भी, उनके सामने उनसे करीब अठारह वर्ष छोटा प्रतिद्वंद्वी था और उन्होंने दर्शकों के सामने अपनी दमदार शैली पेश की। उनकी उम्र को लेकर अलग-अलग संदर्भों में ४१ और ४२ वर्ष का उल्लेख मिलता है; लेकिन यह साफ़ है कि वह इस स्पर्धा के सबसे अनुभवी खिलाड़ियों में से एक हैं।
जीत से बढ़कर प्रतियोगिता का आनंद
मुकाबले के बाद होंगटेन ने कहा कि स्वर्ण पदक की उम्मीद में उन्होंने अपने बाल सुनहरे रंग में रंगवाए थे, इसलिए नतीजे से थोड़ी निराशा हुई। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि प्रतियोगिता का पूरा आनंद लेना उनका पहला लक्ष्य था और वह लक्ष्य पूरा हुआ। उनके अनुसार, इस बार वह केवल जीत पर ध्यान देने के बजाय अपने शरीर को संगीत और लय के साथ बहने देना चाहते थे।
हांगझोऊ में जीत के साथ २०२४ पेरिस ओलंपिक के लिए जगह बनाने की दौड़ जुड़ी हुई थी। इसलिए उस समय उनका ध्यान जीतने पर अधिक था और वह प्रतियोगिता का उतना आनंद नहीं ले पाए। इस बार पहले के अनुभव ने उन्हें अधिक सहजता दी। दर्शकों की तालियों और उत्साह के बीच उन्होंने कहा कि पूरे आयोजन में शायद वही सबसे ज़्यादा मुस्कराए।
तैयारी में अभ्यास और नई चालें
एशियाई खेलों से पहले उन्होंने दक्षिण कोरिया के जिनचॉन प्रशिक्षण केंद्र में नियमित अभ्यास किया। सुबह ताकत बढ़ाने वाले व्यायाम, दोपहर में नृत्य का अभ्यास और शाम को व्यक्तिगत प्रशिक्षण—इस दिनचर्या से उन्होंने अपनी शारीरिक तैयारी को बेहतर बनाने की कोशिश की। उन्होंने अपनी प्रस्तुति के शुरुआती हिस्से और अलग-अलग चालों पर भी बारीकी से काम किया।
ब्रेकिंग में फ़र्श पर घूमने या हाथों के बल करतब करने से पहले खड़े होकर की जाने वाली नृत्य-चालें भी प्रस्तुति का अहम हिस्सा होती हैं। होंगटेन ने उस हिस्से में भी नए कदम जोड़े, ताकि दर्शकों को कुछ नया दिखा सकें। इसका उद्देश्य सिर्फ़ कठिन चालें करना नहीं था, बल्कि संगीत, गति और व्यक्तित्व को एक ही प्रदर्शन में जोड़ना था।
सीखते रहना ही आगे बढ़ने की वजह
होंगटेन का कहना है कि ब्रेकिंग की दुनिया लगातार बदल रही है और युवा कलाकार नए तरीके तथा नई शैलियाँ ला रहे हैं। वह केवल अपने पुराने अंदाज़ पर निर्भर नहीं रहना चाहते; इसके बजाय वह नई पीढ़ी के नृत्य से सीखने की कोशिश करते हैं। उनके मुताबिक, दूसरे कलाकारों की चालों और सोच को समझना उन्हें अब भी उत्साहित रखता है।
“युवा कलाकार जिस तरह नृत्य करते हैं, उससे सीखना ही मेरे लगातार नृत्य करते रहने की प्रेरणा है,” उन्होंने कहा।
उनकी यह सोच बताती है कि लंबे अनुभव का मतलब सीखना बंद कर देना नहीं होता। किसी अनुभवी खिलाड़ी के लिए बदलते तरीकों को अपनाना वैसा ही है, जैसे कोई संगीतकार नई धुनों से परिचित हो या कोई शिल्पकार नए औज़ार इस्तेमाल करना सीखे। होंगटेन के लिए यह बदलाव चुनौती भी है और अपने काम में आनंद बनाए रखने का रास्ता भी।
दोस्तों के साथ शुरू हुआ सफ़र
होंगटेन ने माध्यमिक विद्यालय के दिनों में दोस्तों के साथ नृत्य करते हुए ब्रेकिंग शुरू की थी। शुरुआत में यह साथियों के साथ समय बिताने और मज़े करने का तरीका था। लेकिन नृत्य के ज़रिए नए लोगों से मिलने और अपने कौशल को बेहतर करने का अनुभव धीरे-धीरे उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया।
२००२ में वह किसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण जीतने वाले पहले दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी बने और इससे उन्हें देश तथा विदेश में पहचान मिली। उन्होंने ब्रेकिंग की प्रतिष्ठित वैश्विक प्रतियोगिता रेड बुल बीसी वन के फ़ाइनल में भी तीन बार—२००६, २०१३ और २०२३ में—जीत हासिल की। वह कहते हैं कि २००२ की पहली बड़ी जीत से मिला उत्साह आज भी याद है और एशियाई खेलों में हिस्सा लेना उनके खेल-जीवन के सबसे यादगार अनुभवों में से एक है।
ब्रेकिंग केवल प्रतियोगिता नहीं, एक संस्कृति भी
ब्रेकिंग का विकास नृत्य और शहरी युवा संस्कृति के मेल से हुआ है। प्रतियोगिताओं में कलाकार संगीत पर अपनी रचनात्मकता, तकनीक और अंदाज़ दिखाते हैं; लेकिन इसके साथ-साथ यह अभ्यास, सामुदायिक मेल-जोल और अपनी पहचान व्यक्त करने का माध्यम भी है। इसलिए होंगटेन के लिए इसकी अहमियत पदकों से आगे जाती है।
उनका मानना है कि कोरियाई ब्रेकिंग को फिर से मज़बूत बनाने के लिए अनुभव को अगली पीढ़ी तक पहुँचाना ज़रूरी है। वह अपने कौशल और वर्षों के अभ्यास से मिली सीख युवा कलाकारों के साथ बाँटने को तैयार हैं। वह चाहते हैं कि उन्हें ऐसे खिलाड़ी के रूप में याद किया जाए जिसने ब्रेकिंग की संस्कृति और उसके मूल्यों का सम्मान किया तथा नए खिलाड़ियों पर अच्छा प्रभाव छोड़ा।
“नई शुरुआत के लिए देर नहीं होती”
होंगटेन की लगातार प्रतिस्पर्धा करने की कहानी उन लोगों के लिए प्रेरणा बन सकती है जो उम्र, समय या परिस्थितियों को अपनी कोशिशों की सीमा मान लेते हैं। उन्होंने कहा कि वह यह दिखाना चाहते हैं कि जब किसी को लगे कि अब बहुत देर हो चुकी है, तब भी एक नई शुरुआत संभव है। उनका संदेश सिर्फ़ खेल तक सीमित नहीं: किसी नए कौशल को सीखना, काम बदलना या लंबे समय से टाले गए लक्ष्य की ओर लौटना—इन सबकी शुरुआत किसी भी उम्र में की जा सकती है।
उन्होंने खास तौर पर चालीस की उम्र के आसपास के लोगों को हौसला दिया और माना कि जीवन में कठिन दौर आते हैं, लेकिन अच्छे दिन भी हो सकते हैं। अपने लिए नृत्य को उन्होंने मुस्कराने और आगे बढ़ने का एक रास्ता बताया। इस संदेश में जीत का दावा कम और कोशिश जारी रखने का भरोसा अधिक है।
“क्या हम थकते नहीं हैं? फिर भी अच्छे दिन आ सकते हैं। हम सब मिलकर हिम्मत रखें,” उनका संदेश था।
अगला लक्ष्य: अनुभव साझा करना
रजत पदक के बाद भी होंगटेन ने प्रतियोगिता से विराम लेने की बात नहीं कही। वह पहले से ही अगली प्रतियोगिता—राष्ट्रीय खेलों—की तैयारी में जुट गए हैं। आगे उनका ध्यान केवल अपने प्रदर्शन पर नहीं, बल्कि कोरियाई ब्रेकिंग को मज़बूत करने और युवाओं को मार्गदर्शन देने पर भी रहेगा।
उनकी यात्रा यह दिखाती है कि खेल में सफलता केवल पदक से नहीं मापी जाती। लगातार अभ्यास करना, नए तरीकों को अपनाना और अपने अनुभव से दूसरों को आगे बढ़ने में मदद देना भी किसी खिलाड़ी की विरासत का हिस्सा है। होंगटेन के लिए अगली चुनौती शायद यही है: मंच पर नृत्य जारी रखना और यह विश्वास दूसरों तक पहुँचाना कि किसी भी उम्र में आगे बढ़ने की शुरुआत की जा सकती है।



















