हार के बाद भी यादगार रही हॉन्गटेन की प्रस्तुति

जापान के तोकोनामे में हुए 2026 आइची-नागोया एशियाई खेलों के पुरुष ब्रेकिंग फाइनल में दक्षिण कोरिया के किम होंग-योल ने रजत पदक जीता। दर्शकों के बीच हॉन्गटेन के नाम से पहचाने जाने वाले इस खिलाड़ी को जापान के शिगेकिक्स ने 0-3 से हराया। नतीजा स्वर्ण के पक्ष में नहीं रहा, लेकिन हॉन्गटेन ने लगातार दूसरी बार एशियाई खेलों में पदक जीतकर अपनी खास जगह फिर साबित की।

ब्रेकिंग ऐसा नृत्य है जिसमें तेज कदमों, शरीर को जमीन के पास घुमाने, संतुलन बनाए रखने और अचानक दिशा बदलने का मेल होता है। मुकाबले में खिलाड़ी बारी-बारी से अपनी प्रस्तुति देते हैं और निर्णायक उनकी तकनीक, रचनात्मकता तथा संगीत के साथ तालमेल को देखते हैं। इसलिए दर्शकों के लिए यह खेल केवल पदक की दौड़ नहीं, बल्कि आमने-सामने की कलात्मक चुनौती भी बन जाता है।

फाइनल का नतीजा 0-3 रहा, लेकिन हॉन्गटेन की प्रस्तुति पर दर्शकों की जोरदार प्रतिक्रिया ने दिखाया कि खेल का असर पदक से आगे भी जाता है।

रजत पदक से पहले का स्वर्ण

हॉन्गटेन ने पिछले एशियाई खेलों में भी हिस्सा लिया था। ब्रेकिंग को पहली बार एशियाई खेलों में आधिकारिक पदक वाला खेल बनाया गया था; यह प्रतियोगिता 2022 के लिए निर्धारित थी, लेकिन 2023 में आयोजित हुई। उस आयोजन में हॉन्गटेन ने स्वर्ण पदक जीता था।

इस बार वह खिताब का बचाव नहीं कर पाए, मगर एक और पदक हासिल करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। लगातार दो खेलों में पदक जीतना यह बताता है कि उन्होंने अलग-अलग दौर और प्रतिद्वंद्वियों के बीच अपना स्तर बनाए रखा। उम्र और शरीर पर पड़ने वाले दबाव को देखते हुए यह काम और भी चुनौतीपूर्ण है।

फाइनल का दबाव और मुकाबले का रोमांच

मुकाबले के अंत में जब संचालक और दर्शक उलटी गिनती करते हैं, तो दोनों खिलाड़ियों के अंक एक साथ सामने आते हैं। उस क्षण का तनाव किसी करीबी खेल मुकाबले जैसा होता है, लेकिन यहां जीत का रास्ता केवल ताकत से नहीं बनता। हर प्रस्तुति में खिलाड़ी को अपनी पहचान दिखानी होती है और साथ ही प्रतिद्वंद्वी की शैली का जवाब भी देना होता है।

हॉन्गटेन ने माना कि वह सोचते हैं, अगर वे पांच साल कम उम्र के होते तो मुकाबला और कठिन बना सकते थे। फिर भी इस बार उनका ध्यान केवल जीत पर नहीं था। उन्होंने कहा कि पिछले एशियाई खेलों में ओलंपिक में जगह पाने की दौड़ के कारण वह जीत पर अधिक केंद्रित थे, जबकि इस बार उन्होंने खुद को संगीत और मंच के हवाले किया।

तैयारी में ताकत, अभ्यास और अनुशासन

इस प्रतियोगिता से पहले हॉन्गटेन ने राष्ट्रीय प्रशिक्षण केंद्र में नियमित कार्यक्रम अपनाया। उनकी दिनचर्या में सुबह शक्ति बढ़ाने वाला अभ्यास, दोपहर में नृत्य का प्रशिक्षण और शाम को व्यक्तिगत अभ्यास शामिल था। ब्रेकिंग में शरीर को बार-बार मोड़ना, घूमना और जमीन से उठकर संतुलन बनाना पड़ता है, इसलिए अभ्यास केवल कदम याद करने तक सीमित नहीं रहता।

लगातार तेज गति से प्रस्तुति देने के लिए ताकत, सहनशक्ति और शरीर पर नियंत्रण जरूरी है। एक गलत संतुलन या थकान किसी कठिन चाल को बिगाड़ सकती है। हॉन्गटेन ने अपनी दूसरी एशियाई खेल प्रतियोगिता में पहले से अधिक दिखाने की तैयारी की थी, और दर्शकों की प्रतिक्रिया से साफ था कि उनका प्रदर्शन लोगों तक पहुंचा।

  • सुबह का शक्ति अभ्यास शरीर को कठिन गतिविधियों के लिए तैयार करता है।
  • नृत्य अभ्यास से चालों और संगीत के तालमेल को बेहतर किया जाता है।
  • शाम का व्यक्तिगत अभ्यास खिलाड़ी को अपनी कमजोरियों पर अलग से काम करने का समय देता है।

किशोरावस्था से विश्व मंच तक

हॉन्गटेन ने माध्यमिक विद्यालय की दूसरी कक्षा में दोस्तों के साथ नाचना शुरू किया था। शुरुआत में यह साथियों के बीच समय बिताने और आनंद लेने का तरीका था। बाद में उन्हें नृत्य के जरिए नए लोगों से मिलने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर मिला, और ब्रेकिंग धीरे-धीरे उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गई।

2002 में वह विश्व प्रतियोगिता जीतने वाले पहले दक्षिण कोरियाई खिलाड़ी बने और इस जीत ने उन्हें देश तथा विदेश में पहचान दिलाई। इसके बाद उन्होंने विश्व के प्रतिष्ठित ब्रेकिंग आयोजनों में से एक रेड बुल बीसी वन फाइनल तीन बार जीता—2006, 2013 और 2023 में। इतने लंबे समय तक शीर्ष स्तर पर बने रहने के लिए केवल हुनर नहीं, बल्कि लगातार सीखते रहने की इच्छा भी जरूरी होती है।

पुरानी उपलब्धियों से आगे बढ़ने की प्रेरणा

हॉन्गटेन ने कहा कि 2002 में पहली बार विश्व प्रतियोगिता जीतने से मिली खुशी और उपलब्धि का एहसास आज भी उन्हें याद है। उनके लिए एशियाई खेलों में हिस्सा लेना भी ऐसे अनुभवों में शामिल है जिन्हें वह अपने खेल जीवन में नहीं भूलेंगे। पुराने पदक उनकी कहानी का हिस्सा हैं, लेकिन वह उन्हें अपनी यात्रा का आखिरी पड़ाव नहीं मानते।

नई पीढ़ी से सीखना ही आगे बढ़ने का तरीका

उनकी उम्र में कई खिलाड़ी प्रतियोगिता से दूर हो चुके होते हैं, लेकिन हॉन्गटेन अब भी अभ्यास और मुकाबले जारी रखे हुए हैं। उन्होंने बताया कि युवा नर्तकों के तरीके सीखना उन्हें ऊर्जा देता है। ब्रेकिंग की शैली और चलन बदलते रहते हैं; ऐसे में केवल पुराने तरीके पर टिके रहने के बजाय नए विचारों को अपनाना उन्हें दिलचस्प लगता है।

हॉन्गटेन का संदेश है कि किसी काम को शुरू करने के लिए देर हो चुकी है, ऐसा मान लेना जरूरी नहीं। उनकी चुनौती दूसरों के लिए साहस और उम्मीद की छोटी-सी वजह बन सकती है।

उनका अनुभव इस बात का उदाहरण है कि किसी क्षेत्र में लंबे समय तक टिके रहने के लिए पुराने हुनर को दोहराना ही काफी नहीं होता। जैसे कोई संगीतकार नए सुरों और ध्वनियों को सुनता है, वैसे ही हॉन्गटेन युवा खिलाड़ियों की शैली को देखकर सीखते हैं। यही खुलापन उन्हें बदलते खेल के साथ आगे बढ़ने में मदद करता है।

पदक से आगे: नृत्य से मिली खुशी

हॉन्गटेन ने कहा कि जीवन में कठिन समय आए, तो नृत्य ने उन्हें फिर से मुस्कराने में मदद की। स्वर्ण पदक की उम्मीद में उन्होंने अपने बाल सुनहरे रंग में रंगवाए थे, लेकिन इस बार स्वर्ण नहीं मिला। इसके बावजूद उन्होंने मंच का आनंद लिया और प्रतियोगिता के अंत में मुस्कराते हुए वहां से निकले।

उनकी यात्रा यह भी दिखाती है कि खेल की सफलता को केवल पदक से नहीं मापा जा सकता। उम्र के साथ शरीर की चुनौतियां बढ़ सकती हैं, प्रतिद्वंद्वी बदलते हैं और खेल का चलन भी नया रूप लेता है; फिर भी जिज्ञासा और अभ्यास खिलाड़ी को लंबे समय तक सक्रिय रख सकते हैं। हॉन्गटेन की अगली चुनौती क्या होगी, यह अभी स्पष्ट नहीं, लेकिन उनका प्रदर्शन बताता है कि वह सीखना और नाचना जारी रखना चाहते हैं।

दर्शकों के लिए उनका संदेश

हॉन्गटेन चाहते हैं कि लोग ब्रेकिंग देखकर कुछ देर के लिए मुस्कराएं और ऊर्जा महसूस करें। एशियाई खेलों के समापन से एक दिन पहले उनकी प्रस्तुति ने दर्शकों को वही खुशी दी। रजत पदक उनके परिणाम का नाम है; उनकी कहानी, हालांकि, मंच पर लौटने, बदलते रहने और नृत्य का आनंद लेने की है।