साइमन फ्रेज़र विश्वविद्यालय (사이먼프레이저대학교) के शोधकर्ताओं ने मर्क के वैज्ञानिकों के सहयोग से न्यूक्लियोसाइड एनालॉग्स—ऐसे पदार्थ जिन्हें आनुवंशिक पदार्थ के घटकों की नकल करके वायरस के बढ़ने में बाधा डालने के लिए बनाया जाता है—को अधिक तेजी से और विविध रूपों में बनाने की संश्लेषण विधि प्रस्तुत की। इस विधि से शोधकर्ताओं ने 70 से अधिक संभावित उम्मीदवार बनाए, जिनमें से तीन पदार्थों ने कोशिका-आधारित परीक्षणों में एचआईवी को रोकने की आशाजनक गतिविधि दिखाई। हालाँकि, ये प्रयोगशाला के शुरुआती नतीजे हैं और नैदानिक परीक्षणों तक पहुँचने में अभी लंबी प्रक्रिया बाकी है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

रेमडेसिविर उन दवाओं में से एक है जिनका इस्तेमाल डॉक्टरों ने कोविड-19 महामारी के शुरुआती दौर में किया था। मूल लेख के अनुसार, यह दवा न्यूक्लियोसाइड एनालॉग्स के वर्ग में आती है और इसी वर्ग की दवाएँ एचआईवी, हेपेटाइटिस और कुछ कैंसर के इलाज में भी इस्तेमाल होती हैं। यह वर्ग वायरस की आनुवंशिक सामग्री की प्रतिलिपि बनाने की प्रक्रिया में बाधा डालकर काम करता है।

समस्या यह है कि ऐसे अणुओं को बनाना जटिल होता है। पारंपरिक तरीकों में आम तौर पर एक अणु बनाने के लिए लंबी प्रतिक्रिया-प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है; किसी दूसरे उम्मीदवार की जाँच के लिए संश्लेषण प्रक्रिया फिर से शुरू करनी होती है। शोधकर्ता लगभग 10 वर्षों से इस प्रक्रिया को तेज करने के तरीके विकसित कर रहे हैं। 2020 में उन्होंने ऐसी विधि प्रकाशित की थी, जो पारंपरिक संश्लेषण के अधिकतर चरणों से बचकर अणु बनाने का समय कई महीनों से घटाकर लगभग एक सप्ताह कर देती थी।

इस अध्ययन में हर उम्मीदवार को शुरू से बनाने के बजाय, पहले एक ऐसा साझा मुख्य हिस्सा तैयार किया गया जिसका इस्तेमाल कई अणुओं में किया जा सके। शोधकर्ताओं ने अमीनो अम्ल उत्प्रेरक—रासायनिक प्रतिक्रिया को होने में मदद करने वाला पदार्थ—का इस्तेमाल करके रासायनिक जोड़ वाला एक मुख्य अणु बनाया। इसके बाद दृश्य प्रकाश से संचालित एक-चरणीय प्रतिक्रिया के जरिए इसे अलग-अलग आणविक टुकड़ों के साथ जोड़ा। शोधकर्ताओं के अनुसार, अंतिम जोड़ का चरण तेजी से पूरा किया जा सकता है, इसलिए अलग-अलग उम्मीदवारों को समानांतर रूप से बनाया जा सकता है।

इस विधि से बनाए गए पदार्थों में ऐसे रूप भी शामिल थे जिनमें शर्करा वलय के ऑक्सीजन को सल्फर या नाइट्रोजन से बदल दिया गया था। शोधकर्ताओं ने कोशिकाओं के भीतर अधिक आसानी से प्रवेश करने के लिए बनाया गया एक रूप भी तैयार किया। उन्होंने यह भी बताया कि एक ऐसे यौगिक को, जिसके संश्लेषण के लिए पहले 16 चरणों की जरूरत होती थी, नई विधि से केवल 6 चरणों में बनाया गया।

इस खबर का क्या अर्थ है

नई संश्लेषण विधि का महत्व यह नहीं है कि इससे कोई नया उपचार मिल गया है जिसकी प्रभावकारिता की पुष्टि हो चुकी हो। शोधकर्ताओं के अनुसार, इस मंच की मदद से संभावित उम्मीदवारों का ऐसा समूह कुछ ही हफ्तों में बनाया जा सकता है, जो पहले व्यावहारिक रूप से संभव समूह से 10 से 100 गुना बड़ा है—और इसके लिए महीनों या वर्षों की जरूरत नहीं होगी। उम्मीदवारों को अधिक तेजी से और विविध रूपों में तैयार करने से शोधकर्ताओं के पास तुलना और परीक्षण के लिए शुरुआती विकल्प बढ़ सकते हैं, जिससे नए वायरस से निपटने की संभावनाएँ बढ़ सकती हैं। लेकिन संभावित उम्मीदवारों की संख्या बढ़ना और वास्तव में इस्तेमाल की जा सकने वाली दवा विकसित होना अलग-अलग चरण हैं।

उदाहरण के लिए, अगर कोई शोधकर्ता किसी खास वायरस पर असर डालने वाला अणु-रूप खोजना चाहता है, तो वह इस विधि से साझा मुख्य हिस्से में अलग-अलग आणविक टुकड़े जोड़कर कई उम्मीदवार बना सकता है और फिर प्रयोगों में उनकी तुलना कर सकता है। यह मान्यता है कि इससे उम्मीदवारों की खोज की गति और दायरा बढ़ सकता है; इसका अर्थ यह नहीं है कि उनमें से कोई एक मनुष्यों के लिए सुरक्षित या प्रभावी होगा।

मूल लेख के अनुसार, शोधकर्ताओं के तीन एचआईवी-विरोधी उम्मीदवारों ने कोशिका-आधारित परीक्षणों में वायरस को रोकने का ऐसा प्रभाव दिखाया जो पहले से मंजूर कुछ एचआईवी उपचारों के स्तर के समान था। लेकिन मनुष्यों में उनकी सुरक्षा या प्रभावकारिता की पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि उपचार की प्रतीक्षा कर रहे मरीजों को इन नतीजों को तुरंत उपचार के नए विकल्प के रूप में देखने के बजाय शुरुआती शोध की संभावना के रूप में समझना चाहिए।

शोध के नतीजों के साथ हितों के खुलासे पर भी ध्यान देना जरूरी है। साइमन फ्रेज़र विश्वविद्यालय ने न्यूक्लियोसाइड एनालॉग्स के संश्लेषण से संबंधित पेटेंट के लिए आवेदन किया है और तकनीक का लाइसेंस क्लाउडबर्स्ट बायोटेक को दिया गया है। मूल लेख में खुलासा किया गया है कि रॉबर्ट ब्रिटन उस कंपनी के सह-संस्थापक, शेयरधारक और निदेशक मंडल के सदस्य हैं तथा 2024 में मर्क के सशुल्क सलाहकार थे। यह जानकारी शोध के नतीजों की प्रभावकारिता तय करने का आधार नहीं है, लेकिन पाठकों के लिए शोध से जुड़े व्यावसायिक संबंधों को समझना जरूरी है।

क्या पुष्टि हुई है और क्या अभी अज्ञात है

पुष्टि हुई बातें

  • शोधकर्ताओं ने अमीनो अम्ल उत्प्रेरक और दृश्य प्रकाश से संचालित एक-चरणीय प्रतिक्रिया का इस्तेमाल करके संभावित पदार्थों का संश्लेषण किया।
  • इस विधि से 70 से अधिक न्यूक्लियोसाइड एनालॉग्स की एक लाइब्रेरी बनाई गई।
  • एक ऐसे यौगिक का संश्लेषण 6 चरणों में किया गया, जिसके लिए पहले 16 चरणों की जरूरत होती थी।
  • तीन यौगिकों ने कोशिका-आधारित परीक्षणों में आशाजनक एचआईवी-विरोधी गतिविधि दिखाई; मूल लेख के अनुसार, उनका प्रभाव कुछ मंजूर एचआईवी उपचारों के स्तर के समान था।
  • नैदानिक परीक्षणों तक पहुँचने में अभी लंबी प्रक्रिया बाकी है।

अभी अज्ञात बातें

  • एचआईवी-विरोधी गतिविधि दिखाने वाले तीन यौगिकों के विशिष्ट नाम और संरचनाएँ क्या हैं?
  • क्या मनुष्यों पर किए जाने वाले परीक्षणों में इन पदार्थों की सुरक्षा और प्रभावकारिता की पुष्टि हो सकती है?
  • अगर नैदानिक परीक्षण किए जाते हैं, तो उनका समय और प्रक्रिया क्या होगी?

पाठकों को किन बातों की जाँच करनी चाहिए

  • शोध के नतीजे पढ़ते समय पहले यह अंतर समझें कि वे कोशिका-आधारित प्रयोगों के हैं या मनुष्यों पर किए गए नैदानिक परीक्षणों के।
  • यह जाँचना कि संभावित पदार्थों के विशिष्ट नाम और संरचनाएँ तथा आगे के परीक्षणों के नतीजे सार्वजनिक किए गए हैं या नहीं, यह समझने में मदद कर सकता है कि शुरुआती गतिविधि वास्तविक दवा-विकास तक पहुँचती है या नहीं।
  • शोध की व्याख्या करते समय मूल लेख में बताए गए हितों पर भी ध्यान दें—जैसे पेटेंट आवेदन, तकनीक का लाइसेंस और शोधकर्ताओं के कंपनी या परामर्श से जुड़े संबंध।