हानग्योरे समाचारपत्र (한겨레) और जनमत सर्वेक्षण संस्था ओपिनियन्स (오피니언즈) ने पिछले अगस्त में देशभर के 60–74 वर्ष के 532 महिला और पुरुषों का सर्वेक्षण किया। इसमें 95% ने कहा कि वे AI सीखना चाहते हैं। AI के दौर को लेकर 40.5% ने उम्मीद और 10.8% ने चिंता जताई। आगे किए गए साक्षात्कारों में सीखने की प्रेरणा सिर्फ़ मज़े और जिज्ञासा तक सीमित नहीं थी; उसमें रोज़गार और आमदनी बचाए रखने की चाह, पीछे छूट जाने की चिंता और लोगों से जुड़े रहने की इच्छा भी शामिल थी।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

यह अनुवर्ती सर्वेक्षण असल प्रतिभागियों को दोबारा बुलाकर उनका साक्षात्कार लेने के तरीके से नहीं किया गया। सिंथेटिक सर्वे (신세틱 서베이) एक ऐसी शोध-पद्धति है जिसमें सर्वेक्षण के नतीजों के आधार पर किसी समूह की विशेषताओं और अनुभवों वाले काल्पनिक व्यक्ति—यानी पर्सोना—बनाए जाते हैं और AI उनका साक्षात्कार करता है। 532 प्रतिभागियों को AI के प्रति उनकी धारणा और उससे परिचित होने के स्तर के आधार पर सक्रिय, संशयवादी, प्रतीक्षारत, संभावित और अनिश्चित—इन पाँच प्रकारों में बाँटा गया, और हर प्रकार के लिए कुल 20 पर्सोना तैयार किए गए।

शोधकर्ताओं ने इन पर्सोना से 90–110 सवाल पूछे और 80 मिनट तक बातचीत की। इसके लिए इस्तेमाल किया गया मॉडल क्लॉड फेबल 5 (Claude Fable5) था। दूसरे मूल लेख में सर्वेक्षण की रूपरेखा तैयार करने वालों ने बताया कि उन्होंने सवाल इंसानों से तैयार करवाए और AI से जवाबों के बीच बातचीत को आगे बढ़वाया। उन्होंने निर्देश दिया कि सर्वेक्षण में चुने गए जवाब न बदले जाएँ और सर्वेक्षण में शामिल न रही बातों को चिह्नित किया जाए।

इस पद्धति को चुनने की वजह भी बताई गई। सर्वेक्षण की रूपरेखा तैयार करने वालों के मुताबिक, पुराने प्रतिभागियों से दोबारा संपर्क करके साक्षात्कार का अनुरोध करने पर जवाब देने वालों का अनुपात लगभग 3% रहता है। और उनमें भी समय की सुविधा रखने वाले या विषय में दिलचस्पी लेने वाले लोगों की संख्या ज़्यादा हो सकती है। यह उन लोगों की आवाज़ छूट जाने की आशंका को कम करने की कोशिश है जिनकी बातों पर नीतियों को ध्यान देना चाहिए—जैसे वे लोग जिनकी दिलचस्पी कम है या जो रोज़ी-रोटी के लिए व्यस्त रहते हैं।

इस ख़बर का अर्थ

95% का आँकड़ा सर्वेक्षण में शामिल 60–74 वर्ष के प्रतिभागियों की सीखने की इच्छा दिखाता है। लेकिन “सीखना चाहते हैं” कहने का यह मतलब नहीं कि वे सचमुच प्रशिक्षण में हिस्सा लेने या उसका खर्च चुकाने के लिए तैयार हैं। दूसरे मूल लेख के मुताबिक, आधे से अधिक प्रतिभागियों ने कहा कि प्रशिक्षण मुफ़्त होना चाहिए। अधिक दिलचस्पी और प्रशिक्षण तक पहुँच के बीच अंतर हो सकता है, इसलिए सिर्फ़ इच्छा के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि प्रशिक्षण की ज़रूरत पूरी हो गई है।

पर्सोना साक्षात्कारों में सीखने की कई वजहें सामने आईं। किसी वर्चुअल प्रतिभागी ने मज़े और दूसरों से आगे रहने की चाह की बात की, जबकि एक अन्य ने इस आशय का जवाब दिया कि काम जारी रखने के लिए AI को समझना ज़रूरी है। कुछ पर्सोना ने कहा कि अगर वे काम कर सकें तो सीखने के लिए पैसे देने को भी तैयार हैं, लेकिन कुछ जवाबों में यह भरोसा नहीं दिखा कि सीखने के बाद वे सचमुच काम कर पाएँगे। इसलिए प्रशिक्षण का महत्व सिर्फ़ तकनीक सीखने तक सीमित नहीं है; यह इस बात से भी जुड़ा है कि सीखने से रोज़गार या आमदनी के अवसर मिल सकते हैं या नहीं।

रिश्तों और अकेलेपन का मुद्दा भी सामने आया। अकेले रहने वाले पर्सोना “संभावित 61” (잠재61) ने कहा कि वह सिर्फ़ नौकरी के लिए नहीं, बल्कि अकेलेपन को कम करने और घर से बाहर निकलने का अवसर पाने के लिए भी सीखना चाहता है। यह इस बात का उदाहरण है कि AI सीखने को सिर्फ़ व्यक्ति के डिजिटल कौशल हासिल करने तक सीमित करके देखना मुश्किल है। हालांकि, यह ध्यान रखना चाहिए कि यह बात किसी वास्तविक प्रतिभागी ने साक्षात्कार में नहीं कही थी; यह सर्वेक्षण के नतीजों के आधार पर बनाए गए वर्चुअल पर्सोना का जवाब था।

देखभाल संबंधी AI को लेकर भी सभी का रुख एक जैसा नहीं था। पर्सोना ने हालचाल पूछने, आपात स्थिति का पता लगाने और बातचीत का साथी बनने जैसी सुविधाओं में दिलचस्पी और इस्तेमाल की इच्छा दिखाई, लेकिन आम तौर पर उनका जवाब इस आशय का था कि वे इसे “बाद में, ज़रूरत पड़ने पर” इस्तेमाल करेंगे। यह बात ध्यान देने योग्य है, क्योंकि देखभाल संबंधी AI में रुचि का मतलब यह नहीं है कि लोग तुरंत इंसानी देखभाल की जगह मशीन को लाना चाहते हैं। लेख में यह चिंता भी शामिल थी कि ज़रूरत महसूस होने से पहले लोग उपकरण का इस्तेमाल टाल सकते हैं, या इसका इस्तेमाल करना “बूढ़ा दिखने” की छवि से जुड़ सकता है।

सीखने के तरीके के बारे में लोगों से सीधे, अपने स्तर के मुताबिक सीखने की पसंद सामने आई। अगर इसे वास्तविक प्रशिक्षण में बदला जाए, तो शुरुआती लोगों के लिए चरण-दर-चरण निर्देश, सवाल पूछने की गुंजाइश और कामकाजी लोगों के लिए भाग लेने का सुविधाजनक तरीका अहम हो सकता है। यह साक्षात्कार में सामने आई मांगों के आधार पर किया गया निष्कर्ष है; इसका मतलब यह नहीं कि इस तरह का अनुकूलित प्रशिक्षण पहले से उपलब्ध है।

मिसाल के तौर पर, कोई व्यक्ति AI सीखना चाहता हो, लेकिन उसे स्मार्टफ़ोन इस्तेमाल करना भी मुश्किल लगता हो, तो शायद वह ऐसी कक्षा चाहेगा जहाँ एक साथ कई सुविधाएँ सीखने के बजाय बुनियादी बातों से धीरे-धीरे शुरुआत हो और सवाल पूछने का मौका मिले। इस लेख में शामिल पर्सोना की सीखने के तरीकों से जुड़ी पसंद बताती है कि ऐसे अंतर पर ध्यान देना चाहिए।

पुष्ट तथ्य और अभी अज्ञात बातें

पुष्ट तथ्य

  • सर्वेक्षण पिछले अगस्त में देशभर के 60–74 वर्ष के 532 महिला और पुरुषों के बीच किया गया था।
  • सर्वेक्षण में AI सीखने की इच्छा 95%, AI के दौर को लेकर उम्मीद 40.5% और चिंता 10.8% थी।
  • अनुवर्ती साक्षात्कार पाँच प्रकारों से चुने गए 20 वर्चुअल पर्सोना के साथ 80 मिनट तक किए गए और 90–110 सवाल पूछे गए।
  • पर्सोना के जवाबों में रोज़गार और आमदनी की तैयारी, मज़ा, पीछे न छूटने की चाह और सामाजिक जुड़ाव की इच्छा शामिल थी।
  • लेख में बताए गए पर्सोना ने किसी व्यक्ति से सीधे, अपने स्तर के मुताबिक सीखने के तरीके को पसंद किया।

अभी अज्ञात बातें

  • यह नहीं बताया गया कि AI द्वारा बनाए गए पर्सोना के जवाब वास्तविक वरिष्ठ नागरिकों के गहन साक्षात्कारों के नतीजों से कितने मेल खाते हैं।
  • यह पुष्टि नहीं हुई है कि साक्षात्कार के नतीजों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया अनुकूलित AI प्रशिक्षण वास्तव में कब और कहाँ दिया जाएगा।
  • सिर्फ़ इस सर्वेक्षण से यह नहीं जाना जा सकता कि सीखने की इच्छा असल में प्रशिक्षण लेने या रोज़गार और आमदनी के अवसरों में कितनी बदलेगी।

पाठक किन बातों की जाँच करें

  • प्रशिक्षण में हिस्सा लेने पर विचार कर रहे लोग यह जाँच सकते हैं कि कक्षा उनके मौजूदा डिजिटल बुनियादी कौशल के स्तर के अनुरूप है या नहीं, और क्या उसमें सवाल पूछने तथा अभ्यास दोहराने की सुविधा है।
  • काम या आमदनी के लिए सीखने की इच्छा रखने वाले लोग विस्तार से देख सकते हैं कि कक्षा में किन व्यावहारिक कौशलों की शिक्षा दी जाएगी और प्रशिक्षण के बाद किस तरह के नतीजों की उम्मीद की जा सकती है।
  • देखभाल संबंधी AI के बारे में जानने वाले लोग सुविधाओं में अपनी दिलचस्पी के साथ-साथ यह भी सोच सकते हैं कि उन्हें इसकी ज़रूरत कब महसूस होगी और इसके इस्तेमाल को लेकर उन्हें कोई झिझक तो नहीं है।

संदर्भ

  • संदर्भित अन्य रिपोर्ट: hani.co.kr