ऑस्ट्रेलिया के फ़र्नीचर शोरूम, नए सिरे से सजाए गए अपार्टमेंट और जीवनशैली से जुड़ी पत्रिकाओं में ‘स्कैंडिनेवियाई शैली’ लोकप्रिय है—जिसमें हल्के ओक की लकड़ी और लिनेन, सफ़ेद दीवारें, धूसर और बेज रंग साथ दिखाई देते हैं। लेकिन रंगों का यह जाना-पहचाना मेल नॉर्डिक डिज़ाइन की मूल विचारधारा से दूर है। स्कैंडिनेवियाई डिज़ाइन किसी खास रंग के इंटीरियर से ज़्यादा इस दर्शन का नाम था कि अच्छा डिज़ाइन रोज़मर्रा के जीवन को बेहतर कैसे बना सकता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
यह डिज़ाइन आंदोलन 19वीं सदी के उत्तरार्ध और 20वीं सदी की शुरुआत में स्वीडन, डेनमार्क और नॉर्वे में एक सामाजिक-सांस्कृतिक परियोजना के रूप में उभरा। उस समय डिज़ाइनरों, वास्तुकारों और सुधारकों का सवाल था कि डिज़ाइन आम लोगों के रोज़मर्रा के जीवन में किस तरह मदद कर सकता है।
स्वीडिश डिज़ाइन संगठन Svensk Form की स्थापना 1845 में Svenska Slöjdföreningen नाम से हुई थी। 20वीं सदी की शुरुआत में इसने अच्छी तरह डिज़ाइन किए गए, कार्यात्मक उत्पादों का समर्थन किया, जिनका इस्तेमाल केवल अमीर ही नहीं, आम लोग भी कर सकते थे। यानी डिज़ाइन का मूल्य केवल उसके रूप-रंग में नहीं, बल्कि इस बात में भी देखा गया कि उसका इस्तेमाल कौन कर सकता है।
1930 की स्टॉकहोम प्रदर्शनी को स्कैंडिनेवियाई प्रकार्यवादी डिज़ाइन से अंतरराष्ट्रीय दर्शकों का परिचय कराने वाला एक अहम पड़ाव बताया जाता है। स्वीडन में ‘फ़ुंकिस’ कहे जाने वाले इस प्रकार्यवाद ने आधुनिकतावादी विचारों को आम लोगों की रोज़मर्रा की ज़रूरतों से जोड़ा। सुंदरता भी महत्वपूर्ण थी, लेकिन यह माना जाता था कि सुंदरता का कोई उद्देश्य होना चाहिए।
इस आंदोलन के दर्शन को सरलता, कार्यक्षमता, शिल्प-कौशल और सुलभता के रूप में संक्षेपित किया जा सकता है। बेज रंग इन चारों का विकल्प नहीं है।
इसका अर्थ यह नहीं कि तटस्थ रंगों वाले इंटीरियर का कोई महत्व नहीं है। डेनमार्क के ट्रेंड पूर्वानुमानकर्ता माज आर्लियन-शेबोर्ग ने बेज को ‘संकट का विशिष्ट रंग’ बताया। उनका कहना है कि जब बाहरी दुनिया अनिश्चित लगती है, तो तटस्थ रंग आराम और स्थिरता का एहसास दे सकते हैं। हालांकि, रंगों से मिलने वाले मनोवैज्ञानिक प्रभाव और डिज़ाइन आंदोलन के ऐतिहासिक-सामाजिक लक्ष्य अलग-अलग चीज़ें हैं; इन्हें अलग करके देखना ज़रूरी है।
‘ह्यूगे’ के लोकप्रिय होने से भी इस छवि के संकुचित होने में योगदान मिला। 2010 के दशक के मध्य में प्रकाशनों की लहर के दौरान डेनमार्क के ह्यूगे को अक्सर मोमबत्तियों, बुने हुए कंबलों, भेड़ की खाल और तटस्थ रंगों वाले इंटीरियर के दृश्यात्मक सौंदर्य के रूप में पेश किया गया। लेकिन प्रकाशक लार्स एरिक स्ट्रैंडबर्ग ने समझाया कि ह्यूगे सजावट की शैली नहीं, बल्कि लोगों के बीच सहजता, जुड़ाव और साथ होने के एहसास से जुड़ा सामाजिक अनुभव है। ह्यूगे को केवल सजावटी वस्तुओं या रंगों के रूप में अपनाने से उसके आपसी संबंधों से जुड़े अर्थ छूट सकते हैं।
इस ख़बर का अर्थ
बेज रंग का इंटीरियर सुंदर या आरामदेह लगना एक बात है; उसे पूरे नॉर्डिक डिज़ाइन की परिभाषा मान लेना दूसरी। दूसरी तरह की व्याख्या इस सवाल को ओझल कर सकती है कि डिज़ाइन किसके लिए बनाया गया और उससे क्या संभव होता है। नॉर्डिक डिज़ाइन को अधिक सटीक रूप से समझने के लिए रंग के साथ-साथ उसके कार्य, उपयोगकर्ताओं और निर्माण के तरीक़े पर भी ध्यान देना चाहिए।
इसके अलावा, ‘स्कैंडिनेवियाई’ नाम के तहत कई देशों को एक ही रुचि में समेट देने से उनके अंतर मिट जाते हैं। लेख के अनुसार, डेनिश डिज़ाइन की विरासत फ़र्नीचर-निर्माण के शिल्प-कौशल और लकड़ी के डिज़ाइन के स्वर्णिम दौर से गहराई से जुड़ी है; हान्स वेगनर और आर्ने याकॉब्सन इसके उदाहरण हैं। फ़िनिश डिज़ाइन में अधिक साहसी ग्राफ़िक्स और वस्त्रों के साथ रंगों का अभिव्यक्तिपूर्ण इस्तेमाल इसकी विशेषता है, जबकि नॉर्वेजियन डिज़ाइन अक्सर वहाँ के परिदृश्य और प्राकृतिक सामग्रियों से प्रेरणा लेता है।
उदाहरण के लिए, घर के लिए नया फ़र्नीचर चुनते समय केवल यह देखने के बजाय कि उसका रंग ‘नॉर्डिक शैली’ का है या नहीं, यह भी सोचा जा सकता है कि वह किस काम के लिए डिज़ाइन किया गया है, क्या जिन लोगों को उसकी ज़रूरत है उनके लिए उसका इस्तेमाल आसान है, और उसे बनाने का काम कितना उम्दा है। यह किसी खास उत्पाद की सिफ़ारिश करने का पैमाना नहीं, बल्कि लेख में बताए गए कार्यक्षमता, सुलभता और शिल्प-कौशल को उपभोक्ताओं के सवालों में बदलने का तरीका है।
रंगों को लेकर बनी रूढ़ छवि को चुनौती देने वाले उदाहरण भी हैं। स्टॉकहोम के 90 से अधिक मेट्रो स्टेशनों में मूर्तियां, मोज़ाइक, चित्र, इंस्टॉलेशन कला, प्रिंट और उभरी हुई कलाकृतियां प्रदर्शित हैं। इसका अर्थ यह नहीं कि नॉर्डिक देशों के हर इंटीरियर में चटख रंग होते हैं। लेकिन यह दृश्य उस धारणा से मेल नहीं खाता कि स्कैंडिनेवियाई डिज़ाइन का मूल स्वभाव बेज रंग का होना ही है।
पुष्ट तथ्य और जो अब भी अज्ञात है
पुष्ट तथ्य
- स्कैंडिनेवियाई डिज़ाइन 19वीं सदी के उत्तरार्ध और 20वीं सदी की शुरुआत में स्वीडन, डेनमार्क और नॉर्वे में रोज़मर्रा के जीवन को बेहतर बनाने वाले आंदोलन के रूप में उभरा।
- Svensk Form की स्थापना 1845 में Svenska Slöjdföreningen नाम से हुई थी और 20वीं सदी की शुरुआत में इसने आम लोगों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध कार्यात्मक उत्पादों का समर्थन किया।
- 1930 की स्टॉकहोम प्रदर्शनी के ज़रिए स्कैंडिनेवियाई प्रकार्यवादी डिज़ाइन अंतरराष्ट्रीय दर्शकों के बीच जाना गया।
- इस डिज़ाइन दर्शन को सरलता, कार्यक्षमता, शिल्प-कौशल और सुलभता के रूप में संक्षेपित किया जाता है; नॉर्डिक देशों के डिज़ाइन की विशेषताएं और इतिहास अलग-अलग हैं।
- स्टॉकहोम के 90 से अधिक मेट्रो स्टेशनों में अलग-अलग तरह की कलाकृतियां प्रदर्शित हैं।
जो अब भी अज्ञात है
- इस डिज़ाइन दर्शन की छवि किन ठोस रास्तों से घटकर बेज रंग पर केंद्रित वैश्विक छवि बन गई, यह लेख पर्याप्त रूप से नहीं बताता।
- डेनमार्क, फ़िनलैंड और नॉर्वे के बीच के अंतर दिखाने वाली विशिष्ट कलाकृतियां या उदाहरण भी लेख में विस्तार से नहीं दिए गए हैं।
पाठक क्या जांचें
- ‘स्कैंडिनेवियाई शैली’ का वर्णन मिले तो रंग के साथ-साथ कार्यक्षमता, उपयोगकर्ताओं और निर्माण की गुणवत्ता पर भी ध्यान दें।
- ह्यूगे का परिचय देने वाली सामग्री में देखें कि उसका ध्यान केवल सजावट या वस्तुओं पर है, या वह लोगों के बीच सहजता और जुड़ाव के अर्थ को भी बताती है।
- देखें कि डेनमार्क, फ़िनलैंड और नॉर्वे को एक ही डिज़ाइन रुचि में समेटने के बजाय उनके विशिष्ट गुणों को अलग-अलग समझाया गया है या नहीं।



















