44 साल में पहली बार स्वर्ण पदक 40 से नीचे
आइची-नागोया एशियाई खेलों की सभी प्रतियोगिताएं 4 अक्टूबर को घुड़सवारी के अंतिम मुकाबलों के साथ समाप्त हुईं। दक्षिण कोरिया ने कुल 39 स्वर्ण, 43 रजत और 68 कांस्य, यानी 150 पदक जीते और पदक तालिका में तीसरे स्थान पर रहा। चीन 169 स्वर्ण के साथ पहले और मेजबान जापान 83 स्वर्ण के साथ दूसरे स्थान पर रहा।
यह परिणाम दक्षिण कोरिया के लिए खास तौर पर इसलिए अहम है क्योंकि उसका स्वर्ण पदकों का आंकड़ा 1982 के नई दिल्ली एशियाई खेलों के बाद सबसे कम रहा। प्रतियोगिता से पहले कोरियाई खेल अधिकारियों ने 40 से 45 स्वर्ण पदक जीतने का लक्ष्य रखा था, लेकिन टीम उस न्यूनतम लक्ष्य से भी एक पदक पीछे रह गई।
पुरुष फुटबॉल टीम का स्वर्ण दक्षिण कोरिया का इस प्रतियोगिता में 39वां और आखिरी स्वर्ण पदक बना।
दूसरे स्थान से तीसरे तक: बदलता क्षेत्रीय मुकाबला
दक्षिण कोरिया ने 1986 के सियोल एशियाई खेलों में 93 स्वर्ण पदक जीते थे। इसके बाद 2014 के इंचियोन खेलों तक उसने लगातार आठ प्रतियोगिताओं में कम से कम 50 स्वर्ण हासिल किए और इनमें से सात बार पदक तालिका में दूसरा स्थान पाया। 2002 के बुसान खेलों में देश ने अपने इतिहास का सबसे बड़ा प्रदर्शन करते हुए 96 स्वर्ण जीते थे।
यह लंबा सिलसिला 2018 के जकार्ता-पालेमबांग खेलों में टूटा, जब कोरिया 49 स्वर्ण के साथ तीसरे स्थान पर खिसक गया। कोविड-19 महामारी के कारण 2022 के नाम से आयोजित हांगझोउ खेल 2023 में हुए; वहां कोरिया ने 42 स्वर्ण जीते। अब नागोया में यह संख्या घटकर 39 रह गई। यानी दो लगातार प्रतियोगिताओं में स्वर्ण पदकों की संख्या कम हुई है।
जापान और दक्षिण कोरिया के बीच अंतर भी तेजी से बढ़ा। हांगझोउ में जापान ने कोरिया से 10 अधिक स्वर्ण जीते थे; इस बार यह अंतर 44 पदकों तक पहुंच गया। चीन ने 1982 से हर एशियाई खेलों में पदक तालिका में पहला स्थान बनाए रखा है, जबकि कोरिया लंबे समय से अपने क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वी जापान से आगे निकलने की कोशिश कर रहा है।
पदक तालिका के शीर्ष देश
- चीन: 169 स्वर्ण, 89 रजत, 83 कांस्य
- जापान: 83 स्वर्ण, 95 रजत, 91 कांस्य
- दक्षिण कोरिया: 39 स्वर्ण, 43 रजत, 68 कांस्य
- उज्बेकिस्तान और भारत: 21-21 स्वर्ण, क्रमशः चौथे और पांचवें स्थान पर
पारंपरिक मजबूत खेलों में कमी
कोरिया की निराशा का मुख्य कारण सिर्फ कुल स्वर्ण पदकों की संख्या नहीं, बल्कि उन खेलों में कम जीत थी जिनमें देश आम तौर पर मजबूत माना जाता है। तीरंदाजी में अधिकारियों को पांच स्वर्ण की उम्मीद थी, पर टीम ने तीन ही जीते। महिला रिकर्व तीरंदाजी में तो एशियाई खेलों के इतिहास में पहली बार कोरिया को कोई स्वर्ण नहीं मिला। रिकर्व वह तीरंदाजी शैली है जिसमें धनुष की भुजाएं बाहर की ओर मुड़ी होती हैं।
तैराकी में पिछले खेलों के तीन स्वर्ण विजेता किम वू-मिन की चोट ने टीम की योजनाओं को प्रभावित किया। चीन की मजबूत चुनौती के बीच कोरिया को इस खेल में केवल एक स्वर्ण मिला। शूटिंग और ताइक्वांडो ने तीन-तीन स्वर्ण दिलाए, जबकि बैडमिंटन ने दो स्वर्ण जोड़े। ताइक्वांडो में दो स्वर्ण पूमसे से आए—यह निर्धारित तकनीकी मुद्राओं और चालों का प्रदर्शन है—जबकि मुकाबले वाले क्योरुगी वर्ग में केवल सोंग दा-बिन स्वर्ण जीत सकीं।
जूडो में कोरिया को एक स्वर्ण मिला, जिसे हु मी-मी ने जीता। एथलेटिक्स, सेपक टकरॉ (पैरों और सिर से गेंद को जाल के ऊपर मारकर खेला जाने वाला खेल), वुशू और जिउ-जित्सु में टीम को स्वर्ण पदक नहीं मिला। टेबल टेनिस में तीन कांस्य आए, लेकिन न स्वर्ण मिला, न रजत। कोरिया की टेबल टेनिस टीम एशियाई खेलों में इस खेल के शामिल होने के बाद पहली बार किसी भी स्पर्धा के फाइनल तक नहीं पहुंची।
चुनौती यह है कि जिन खेलों में कोरिया लंबे समय तक पदकों पर हावी रहा, वहां अब दूसरे देशों की टीमें भी अधिक मजबूत हो रही हैं।
जापान की बढ़त और चीन का दबदबा
मेजबान जापान ने 83 स्वर्ण जीते और 1966 के बैंकॉक खेलों में बनाए अपने पुराने सर्वश्रेष्ठ आंकड़े 78 को पार कर लिया। हांगझोउ की तुलना में उसके स्वर्ण पदकों की संख्या 31 बढ़ी। जापान ने एथलेटिक्स में 10, जूडो में नौ, साइकिलिंग में आठ और तैराकी तथा कुश्ती में सात-सात स्वर्ण जीते। कोरिया के मजबूत माने जाने वाले तलवारबाजी खेल में भी जापान ने छह स्वर्ण अपने नाम किए।
जापान की सफलता कई खेलों में फैली हुई थी। यही बात किसी एक-दो सितारा खिलाड़ियों की जीत से अलग है: जब अलग-अलग खेलों में खिलाड़ी लगातार पदक जीतते हैं, तो पूरी टीम का प्रदर्शन अधिक स्थिर बनता है। जापान ने कुछ खेलों में अपनी सर्वश्रेष्ठ टीम भी नहीं उतारी, फिर भी पदक हासिल किए। इससे संकेत मिलता है कि वहां खिलाड़ियों और प्रतिस्पर्धी टीमों का आधार व्यापक हो रहा है।
चीन ने 169 स्वर्ण के साथ लगातार 12वीं बार पदक तालिका में पहला स्थान हासिल किया। यह संख्या हांगझोउ के 201 स्वर्ण से कम जरूर थी, लेकिन दक्षिण कोरिया और जापान के संयुक्त स्वर्ण पदकों से भी अधिक रही। चीन ने तैराकी में 30, एथलेटिक्स में 17, शूटिंग में 16, वुशू में 12 और डाइविंग में 10 स्वर्ण जीते।
टीम खेलों में कोरिया की चमक
व्यक्तिगत खेलों में उतार-चढ़ाव के बीच दक्षिण कोरिया ने कई टीम स्पर्धाओं में अच्छा प्रदर्शन किया। बास्केटबॉल में महिलाओं और पुरुषों की पांच-पांच खिलाड़ियों वाली स्पर्धा तथा पुरुषों की तीन-तीन खिलाड़ियों वाली स्पर्धा में स्वर्ण मिले। बेसबॉल टीम ने लगातार पांचवीं बार खिताब जीता, जबकि पुरुष फुटबॉल टीम ने लगातार चौथी बार स्वर्ण हासिल किया। महिला हैंडबॉल टीम आठ साल बाद फिर चैंपियन बनी।
ई-स्पोर्ट्स—यानी वीडियो गेम को प्रतिस्पर्धी खेल के रूप में खेलना—में कोरिया ने अपने दो स्वर्ण पदकों के लक्ष्य को पूरा किया। नौकायन और कैनोइंग ने भी दो-दो स्वर्ण दिए, जबकि पहली बार आधिकारिक खेल बने टेकबॉल से एक स्वर्ण मिला। कुल 22 खेलों में कोरिया ने कम से कम एक स्वर्ण जीता; हांगझोउ में यह संख्या 20 थी। इससे साफ है कि सफलता का दायरा कुछ बढ़ा, लेकिन पारंपरिक मजबूत खेलों में स्वर्ण घटने से कुल संख्या नीचे आ गई।
उत्तर कोरिया ने जापान में पहली बार आयोजित ग्रीष्मकालीन एशियाई खेलों में हिस्सा लिया। उसके 107 खिलाड़ियों ने सात स्वर्ण, 13 रजत और नौ कांस्य पदक जीते और देश 12वें स्थान पर रहा। उसके सभी स्वर्ण भारोत्तोलन में आए। पदकों की संख्या और टीम के आकार को देखते हुए यह अच्छा प्रदर्शन था, लेकिन एक ही खेल पर निर्भरता यह भी दिखाती है कि अन्य खेलों में प्रतिस्पर्धी आधार बढ़ाने की गुंजाइश है।
अब नजर 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक पर
दक्षिण कोरिया के खेल प्रतिनिधिमंडल के प्रमुख किम टेक-सू ने कहा कि अब प्रतिस्पर्धा केवल चीन और जापान से नहीं है। मध्य एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया के देश भी तेजी से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे पूरे महाद्वीप में खेल का स्तर ऊपर जा रहा है। उन्होंने घटते पदकों वाले खेलों का बारीकी से मूल्यांकन करने और 2028 लॉस एंजिलिस ओलंपिक की तैयारी अभी से मजबूत करने पर जोर दिया।
इस प्रतियोगिता का संदेश केवल यह नहीं है कि कोरिया तीसरे स्थान पर रहा। महत्वपूर्ण बात यह है कि जापान ने कई खेलों में अपनी पदक क्षमता बढ़ाई, चीन ने अपना विशाल दबदबा बनाए रखा और अन्य एशियाई देशों ने भी आगे बढ़ने के संकेत दिए। अगले चरण में कोरिया को खिलाड़ियों की चोटों और प्रतियोगिता के दिन के नतीजों से आगे जाकर यह समझना होगा कि प्रशिक्षण, प्रतिभा की पहचान और अलग-अलग खेलों में मजबूत टीम तैयार करने की व्यवस्था कहां सुधारी जा सकती है।
आखिरकार, शीर्ष तीन में रहना अपने आप में मजबूत प्रदर्शन है, लेकिन लगातार घटते स्वर्ण और जापान से बढ़ता अंतर बताते हैं कि पुरानी प्रतिष्ठा पर भरोसा करना पर्याप्त नहीं होगा। तीरंदाजी, तैराकी, जूडो और ताइक्वांडो में प्रतिस्पर्धा फिर तेज करने के साथ-साथ टीम खेलों की सफलता को दूसरे क्षेत्रों में भी दोहराना कोरिया के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी।



















