स्टारबक्स पर उपभोक्ताओं ने मुकदमा दायर किया है। आरोप है कि अमेरिका में बेचे जाने वाले उसके 8 प्रोटीन पेय पर ‘शुगर-फ्री’ का लेबल था, जबकि उनमें वास्तव में चीनी मौजूद है। सिएटल की संघीय अदालत में दायर यह मुकदमा कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन राज्यों में ये पेय खरीदने वाले 3 उपभोक्ताओं की ओर से दायर किया गया है। खबर में उद्धृत स्टारबक्स के अमेरिकी वेबसाइट मेन्यू पर 16 औंस वाले शुगर-फ्री कारमेल प्रोटीन माचा में 16 ग्राम और 20 औंस वाले उत्पाद में 21 ग्राम चीनी दर्ज थी।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
मुद्दा केवल यह नहीं है कि पेय में चीनी है, बल्कि यह भी है कि किसी उत्पाद को ‘शुगर-फ्री’ कहने वाले लेबल का उपभोक्ता क्या अर्थ निकालते हैं। मूल रिपोर्ट 2 के अनुसार, मुकदमे में दावा किया गया कि पेय में लैक्टोज़ है—यह वह चीनी है जो दूध में प्राकृतिक रूप से पाई जाती है। उसी रिपोर्ट में बताया गया कि शिकायत में दावा किया गया है कि 20 या 24 औंस के पेय में 13 से 21 ग्राम चीनी होती है।
सामूहिक मुकदमों में विशेषज्ञ लॉ फर्म हेगन्स बर्मन के सह-संस्थापक स्टीव बर्मन ने कहा कि लोग सामान्य स्वास्थ्य, मधुमेह या रक्त शर्करा के स्तर समेत कई कारणों से चीनी से परहेज करते हैं, इसलिए लेबल का मुद्दा उपभोक्ताओं के लिए अहम है। हालांकि, यह मुकदमा दायर करने वाले पक्ष की ओर से दी गई व्याख्या है; लेबल कानूनी रूप से गलत था या उपभोक्ताओं को नुकसान हुआ, यह मुकदमे में विचाराधीन मुद्दा होगा।
इस खबर का अर्थ
‘शुगर-फ्री’ का लेबल उत्पाद चुनने का आधार हो सकता है। खासकर, चीनी का सेवन कम करने की कोशिश कर रहे उपभोक्ता मेन्यू पर लिखी जानकारी को अपने चुनाव में शामिल कर सकते हैं। इसलिए अगर लेबल और पोषण-संबंधी जानकारी को अलग-अलग अर्थों में लिया जाए, तो इससे उपभोक्ताओं के फैसले और स्वास्थ्य प्रबंधन पर असर पड़ सकता है। लेकिन केवल यह मुकदमा दायर होने से यह साबित नहीं होता कि लेबल गैरकानूनी था या वास्तव में नुकसान हुआ।
उदाहरण के लिए, चीनी से परहेज करने वाला कोई उपभोक्ता मेन्यू पर ‘शुगर-फ्री’ लिखा देखकर पेय चुनता है, लेकिन पोषण-संबंधी जानकारी में चीनी की मात्रा देखता है, तो उसे यह संदेह हो सकता है कि क्या लेबल पर भरोसा करके यह चुनाव करना ठीक है। यह उपभोक्ता के संभावित अनुभव को समझाने वाला एक काल्पनिक उदाहरण है; खबरों में यह नहीं बताया गया कि मुकदमे के हर पक्ष ने किस वजह से खरीदारी की या उन्हें खास तौर पर क्या नुकसान हुआ।
संबंधित नियम और सहायता-संबंधी जानकारी
आंतरिक कानूनी मार्गदर्शिका (L2) के अनुसार, झूठे या भ्रामक विज्ञापन का आकलन करते समय आम तौर पर यह देखा जाता है कि सामान्य सावधानी बरतने वाला उपभोक्ता विज्ञापन का समग्र और अंतिम प्रभाव क्या समझेगा। इसमें यह भी मुद्दा हो सकता है कि विज्ञापन वास्तविकता से अलग है या उपभोक्ता को भ्रमित कर सकता है, साथ ही वास्तविक नुकसान और विज्ञापन के बीच कारण-संबंध क्या है और दावा करने का अधिकार किसे है।
यह मार्गदर्शिका कोरिया में उपभोक्ता नुकसान के बारे में सामान्य जानकारी देती है। इसलिए यह अमेरिका में चल रहे इस मुकदमे के कानूनी मानदंडों या नतीजे की व्याख्या नहीं करती। मूल रिपोर्ट 2 के अनुसार, शिकायत में दावा किया गया कि अमेरिकी संघीय कानून किसी पेय को ‘शुगर-फ्री’ बताने पर रोक लगाता है, अगर उसमें प्रति 12 औंस 0.5 ग्राम से अधिक चीनी हो। खबर में यह मुकदमा दायर करने वाले पक्ष का दावा बताया गया है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि यह मानदंड इस मामले में किस तरह लागू होगा।
खबरों में अलग-अलग बताई गई बातें
दोनों रिपोर्टों में पेय में चीनी की मात्रा अलग-अलग बताई गई। मूल रिपोर्ट 1 में स्टारबक्स की अमेरिकी वेबसाइट पर सोमवार को मौजूद मेन्यू के हवाले से 16 औंस वाले उत्पाद में 16 ग्राम और 20 औंस वाले उत्पाद में 21 ग्राम चीनी बताई गई। मूल रिपोर्ट 2 ने बताया कि शिकायत में दावा किया गया है कि 20 या 24 औंस वाले उत्पाद में 13 से 21 ग्राम चीनी होती है। दोनों रिपोर्टों में दी गई मात्रा और चीनी की जानकारी को एक ही उत्पाद के समान लेबल का विवरण मानना मुश्किल है।
स्टारबक्स के रुख के बारे में भी रिपोर्टों में अंतर है। मूल रिपोर्ट 1 में कंपनी का जवाब नहीं दिया गया, जबकि मूल रिपोर्ट 2 के अनुसार, स्टारबक्स के एक प्रवक्ता ने ईमेल में कहा कि मुकदमे के दावे निराधार हैं और कंपनी पेय तथा पोषण-संबंधी जानकारी लगातार उपलब्ध कराती रही है। इसलिए यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कंपनी ने कोई रुख नहीं बताया।
पुष्ट तथ्य और वे बातें जो अभी पता नहीं हैं
पुष्ट तथ्य
- स्टारबक्स के अमेरिका में बिकने वाले 8 प्रोटीन पेय पर ‘शुगर-फ्री’ लेबल और उनमें मौजूद चीनी की वास्तविक मात्रा के बीच अंतर होने का आरोप लगाते हुए उपभोक्ताओं ने मुकदमा दायर किया है।
- मुकदमा 3 उपभोक्ताओं की ओर से दायर किया गया है। खबरों के अनुसार, उन्होंने कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन राज्यों में पेय खरीदे थे।
- मूल रिपोर्ट 1 में उद्धृत सोमवार के वेबसाइट मेन्यू पर 16 औंस वाले उत्पाद में 16 ग्राम और 20 औंस वाले उत्पाद में 21 ग्राम चीनी दर्ज थी।
- मूल रिपोर्ट 2 में मुकदमा दायर करने वाले पक्ष के लैक्टोज़ और अमेरिकी संघीय कानून से जुड़े दावों के साथ-साथ स्टारबक्स के प्रवक्ता का खंडन भी बताया गया।
वे बातें जो अभी पता नहीं हैं
- बाकी 6 पेय के नाम और उनमें से प्रत्येक में चीनी की मात्रा खबरों में विस्तार से नहीं दी गई है।
- यह पुष्टि नहीं हुई है कि लेबल संबंधित कानूनों का उल्लंघन करता है या उपभोक्ताओं को नुकसान हुआ है।
- मुकदमे की आगे की प्रक्रिया और नतीजा भी अभी पता नहीं है।
पाठक किन बातों की जाँच कर सकते हैं
- पेय चुनते समय केवल ‘शुगर-फ्री’ शब्द ही नहीं, बल्कि संबंधित उत्पाद और मात्रा की पोषण-संबंधी जानकारी भी देखी जा सकती है।
- यह सामान्य जानकारी है; किसी खास मामले में सबूत पेश करने की आवश्यकताएँ मामले और लागू कानून के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।
- यह मामला अमेरिका का मुकदमा है, इसलिए केवल कोरिया की कानूनी मार्गदर्शिका के आधार पर अधिकारों या दावा दायर करने की समय-सीमा तय नहीं की जा सकती। मूल रिपोर्ट में मुकदमे की समय-सीमा या प्रक्रिया नहीं बताई गई है; इसलिए किसी खास अधिकार की पुष्टि के लिए संबंधित मामले पर लागू कानून और प्रक्रिया की अलग से जाँच करनी होगी।
संदर्भ
- उपभोक्ता नुकसान के लिए हर्जाने का दावा करने की मार्गदर्शिका
- संदर्भित अन्य रिपोर्ट: koreatimes.co.kr




















