संसद की वित्त एवं अर्थव्यवस्था योजना समिति (국회 재정경제기획위원회) के विशेषज्ञों द्वारा तैयार और प्रस्तुत समीक्षा रिपोर्ट में विश्लेषण किया गया है कि यदि कोष सरकार के प्रस्ताव के अनुसार बनाया गया, तो बजट और कोष संचालन योजनाओं पर संसद की पूर्व समीक्षा और नियंत्रण कमजोर हो सकता है। खास तौर पर, सरकारी प्रस्ताव की वह सीमा मुद्दा बनी है जिसके तहत खर्च की प्रमुख मदों को संसद की मंजूरी के बिना 30% की सीमा में बदला जा सकता है।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

भविष्य कोष एक नया कोष है, जिसे इस तरह बनाया गया है कि सामान्य रुझान या अनुमान से अधिक कर-राजस्व आने पर उसे युवाओं और विकास के नए स्रोतों जैसे क्षेत्रों में निवेश किया जा सके, ताकि संभावित विकास दर बढ़े; या फिर उसे जमा करके रखा जाए और बाद में राजस्व की कमी होने पर निकाला जा सके। सरकार ने भविष्य कोष अधिनियम (미래기금법) बनाने का विधेयक और राष्ट्रीय वित्त अधिनियम (국가재정법) में संशोधन का विधेयक संसद में पेश किया है। इन विधेयकों की समीक्षा चल रही है।

कोष को दी जाने वाली विवेकाधीन गुंजाइश को लेकर सवाल यह है कि खर्च की योजना में कितनी लचक से बदलाव किया जा सकता है। सरकारी प्रस्ताव के अनुसार, भविष्य कोष की खर्च की प्रमुख मदों में रकम को 30% की सीमा के भीतर संसद की मंजूरी के बिना बदला जा सकता है। समिति का मानना है कि सरकार को वित्तीय प्रबंधन में जितनी अधिक लचक मिलेगी, संसद द्वारा खर्च की योजनाओं की पहले से समीक्षा और नियंत्रण का दायरा उतना ही सीमित हो सकता है।

कोष के आकार का एक उदाहरण देते हुए सरकार ने भविष्य कोष संचालन योजना के मसौदे में बताया कि वह युवा समग्र सहायता कार्यक्रम (청년종합지원 프로그램) में 13.3 ट्रिलियन वॉन लगाएगी। इस रकम पर 30% की सीमा लागू करने पर सरकार अपने विवेक से खर्च 3.99 ट्रिलियन वॉन बढ़ा या घटा सकती है। समिति ने कहा कि अन्य परियोजना-आधारित कोषों की तरह सीमा 20% तय करने की तुलना में, प्रत्येक कार्यक्रम में अपने स्तर पर बदलाव की जा सकने वाली रकम 800 अरब से 1.4 ट्रिलियन वॉन तक बढ़ सकती है।

यहां अपने स्तर पर बदलाव का अर्थ है कि सरकार संसद की अलग से पूर्व मंजूरी लिए बिना योजना में शामिल मदों का खर्च समायोजित करे। इसलिए मुद्दा सिर्फ यह नहीं है कि कोष के लिए कितनी रकम आवंटित की जाए। इसमें यह भी शामिल है कि संसद द्वारा पहले पारित योजना और वास्तविक खर्च के बीच कितना अंतर स्वीकार्य होगा और उसकी सीमा कहां तय की जाएगी।

वित्तपोषण के मामले में ‘अतिरिक्त कर-राजस्व’ और ‘अनुमान से अधिक कर-राजस्व’ अहम हैं। लेख में अतिरिक्त कर-राजस्व को 2027 के राष्ट्रीय कर-राजस्व में उस हिस्से के रूप में बताया गया है जो पिछले 10 वर्षों के घरेलू करों की वृद्धि दर के रुझान से अधिक है। अनुमान से अधिक कर-राजस्व को पुनर्गणना के बाद घरेलू करों के पहले से निर्धारित राजस्व बजट से ऊपर रहने वाली कर-राजस्व वृद्धि के रूप में समझाया गया है। समीक्षा रिपोर्ट का कहना है कि दोनों स्रोत आर्थिक स्थिति और प्रमुख उद्योगों के प्रदर्शन के आधार पर बदल सकते हैं।

इस खबर का मतलब

यदि यह कोष वास्तव में बनाया जाता है, तो इसका महत्व इस बात में है कि अनुमान से अधिक कर-राजस्व मिलने पर उसका उपयोग भविष्य के विकास में निवेश और आगे चलकर राजस्व की कमी से निपटने के लिए किया जा सकेगा। दूसरी ओर, खर्च बदलने की गुंजाइश अधिक होने पर सरकार के पास अलग-अलग कार्यक्रमों के बजट में बदलाव करने की अधिक क्षमता होगी। ऐसे में यह देखने की जरूरत होगी कि संसद द्वारा पहले तय की गई योजना खर्च के दौरान किस हद तक बरकरार रहती है।

मिसाल के तौर पर, यदि युवा समग्र सहायता कार्यक्रम के लिए 13.3 ट्रिलियन वॉन की योजना तय है और सरकार किसी दूसरी जरूरत के कारण उसमें बदलाव पर विचार करती है, तो सरकारी प्रस्ताव की 30% सीमा के तहत संसद की मंजूरी के बिना बदलाव की जा सकने वाली रकम काफी बड़ी हो सकती है। यह एक काल्पनिक उदाहरण है; इसका मतलब यह नहीं है कि कार्यक्रम का खर्च वास्तव में बदला गया है। योजना की रकम और बदलाव की सीमा को साथ देखकर समझना इसलिए जरूरी है कि प्रतिशत के रूप में दी गई सीमा किसी ठोस कार्यक्रम में बड़ी रकम बन सकती है।

वित्तपोषण की स्थिरता इस बात से जुड़ी है कि कोष के वादे आर्थिक हालात पर कितने निर्भर हैं। रिपोर्ट की चिंता है कि यदि अतिरिक्त कर-राजस्व का प्रवाह पर्याप्त रूप से जारी नहीं रहा, तो कोष के संसाधन घट सकते हैं। चूंकि कोष को राजस्व की कमी होने पर इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है, इसलिए ऐसी स्थिति पर विचार करते हुए इसकी मध्यम और दीर्घकालीन स्थिरता की समीक्षा अहम हो सकती है। हालांकि, उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक कर-राजस्व के रुझान या भविष्य में कोष के आकार के बारे में निश्चित निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

क्या पुष्टि हुई है और क्या अभी पता नहीं है

पुष्टि हुई है

  • सरकार ने भविष्य कोष अधिनियम बनाने का विधेयक और राष्ट्रीय वित्त अधिनियम में संशोधन का विधेयक संसद में पेश किया है; उनकी समीक्षा चल रही है।
  • सरकारी प्रस्ताव के तहत भविष्य कोष की प्रमुख मदों के खर्च को 30% की सीमा में संसद की मंजूरी के बिना बदला जा सकता है।
  • युवा समग्र सहायता कार्यक्रम की योजनागत रकम 13.3 ट्रिलियन वॉन है और 30% की सीमा के तहत बदलाव की जा सकने वाली रकम 3.99 ट्रिलियन वॉन है।
  • समिति ने कहा है कि कर-राजस्व और उद्योगों के प्रदर्शन के अनुसार कोष के संसाधन बदल सकते हैं और इसकी मध्यम तथा दीर्घकालीन स्थिरता की समीक्षा जरूरी है।

अभी पता नहीं है

  • भविष्य कोष अधिनियम के विधेयक और राष्ट्रीय वित्त अधिनियम में संशोधन के विधेयक की संसदीय समीक्षा का नतीजा क्या होगा, इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
  • समीक्षा के दौरान सरकारी प्रस्ताव में खर्च बदलने की 30% सीमा में संशोधन होगा या नहीं, यह भी अभी पता नहीं है।
  • अतिरिक्त कर-राजस्व का प्रवाह कितने समय तक जारी रहेगा और उसके अनुसार कोष के संसाधन किस तरह बदलेंगे, इसका आकलन केवल इस खबर के आधार पर नहीं किया जा सकता।

पाठकों को किन बातों पर नजर रखनी चाहिए

  • यह देखना जरूरी है कि संसदीय समीक्षा के दौरान खर्च बदलने की सीमा बरकरार रहती है या अन्य परियोजना-आधारित कोषों की तुलना में उसमें संशोधन होता है।
  • अंतिम विधेयक में संसद की मंजूरी के बिना किन मदों और किस सीमा तक बदलाव की अनुमति होगी, यह देखने से नियंत्रण की व्यवस्था में वास्तविक बदलाव को समझने में मदद मिलेगी।
  • यह भी देखना चाहिए कि कोष के वित्तपोषण के मानदंड और उसकी मध्यम तथा दीर्घकालीन स्थिरता की समीक्षा को अंतिम प्रस्ताव में किस तरह शामिल किया जाता है।