अभियोजन कार्यालय के समाप्त होने के बाद 2 अक्टूबर को अभियोजन कार्यालय और गंभीर अपराध जांच एजेंसी (गंभीर अपराध जांच एजेंसी का संक्षिप्त नाम: 중수청) ने काम शुरू किया। इसके बीच, राष्ट्रपति ली जे-म्यॉंग ने 6 अक्टूबर को राष्ट्रपति कार्यालय (청와대) में हुई मंत्रिमंडल बैठक में इन दोनों निकायों और पुलिस के कार्यवाहक प्रमुखों से मुलाकात की। राष्ट्रपति ली ने नई व्यवस्था की शुरुआत को “जनता का ऐतिहासिक निर्णय” बताया और कहा कि जांच तथा अभियोजन के काम का राजनीतिक सत्ता द्वारा दुरुपयोग या उस पर दबाव डालना फिर कभी नहीं होना चाहिए। उन्होंने गंभीर अपराध जांच एजेंसी से सत्तापक्ष-विपक्ष का भेद किए बिना नेतृत्व वर्ग के अपराधों की कड़ाई से जांच करने का अनुरोध किया।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

मंत्रिमंडल बैठक में अभियोजन कार्यालय के कार्यवाहक प्रमुख ली जोंग-ह्यॉन, गंभीर अपराध जांच एजेंसी के कार्यवाहक प्रमुख चॉन जोंग-मिन और राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी (경찰청) के कार्यवाहक प्रमुख किम जोंग-चोल शामिल हुए। राष्ट्रपति ली ने उनसे कहा कि जांच और अभियोजन निकायों को किसी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं करना चाहिए और न ही ऐसे अन्याय को अनदेखा करना चाहिए। बैठक के बाद उन्होंने तीनों कार्यवाहक प्रमुखों के साथ दोपहर का भोजन किया।

राष्ट्रपति ली ने कहा कि आज़ादी के बाद सरकार की स्थापना से लेकर अभियोजन विभाग के पास बहुत अधिक शक्ति थी और एक समय ऐसा आया जब उसने राष्ट्रीय सत्ता का दुरुपयोग करके लोगों पर ऐसे अपराध मढ़े जो उन्होंने किए ही नहीं थे। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट रूप से नहीं बताया कि उनके मन में कौन-से मामले थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब स्थिति जांच और अभियोजन के काम को अलग करने और उनके अधीनस्थ निकायों को भी बदलने तक पहुंच गई है, तब अतीत की तरह सत्ता का दुरुपयोग दोहराया नहीं जाना चाहिए।

विवाद सिर्फ हिदायतों के विषय को लेकर ही नहीं, उन्हें देने के तरीके को लेकर भी उठा। राजनीतिक जगत और कानूनी क्षेत्र में आलोचना हुई कि जांच और अभियोजन निकायों के प्रमुखों का मंत्रिमंडल बैठक में शामिल होना और राष्ट्रपति के साथ दोपहर का भोजन करना उनकी स्वतंत्रता को कमजोर कर सकता है। इसके उलट, राष्ट्रपति कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि उनकी जानकारी में नई एजेंसियों से यह अनुरोध किया गया था कि वे जांच और अभियोजन की प्रक्रिया में कोई खालीपन आए बिना सुचारु रूप से स्थापित हों। दोनों व्याख्याओं के बीच मुख्य सवाल यह है कि नए निकायों की जवाबदेही बढ़ाने और उन्हें राजनीतिक सत्ता से दूर रखने की गारंटी एक साथ कैसे दी जा सकती है।

विपक्ष ने आलोचना की कि राष्ट्रपति ली, मनगढ़ंत अभियोजन मामलों की विशेष जांच के कानून की जरूरत का फिर से जिक्र करके अभियोग वापस लेने की दिशा में “रास्ता तैयार” कर रहे हैं। यह विपक्ष का दावा है; सिर्फ खबरों में दी गई जानकारी के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि राष्ट्रपति ने अभियोग वापस लेने का निर्देश दिया था या ऐसी मंशा की पुष्टि हुई है। हिदायतों और आलोचना को अलग-अलग समझना महत्वपूर्ण है।

इस खबर का अर्थ

जांच निकायों की शक्तियों का इस्तेमाल अपराधों का पता लगाने के लिए किया जा सकता है, लेकिन इन पर नियंत्रण होना चाहिए ताकि सत्ता के दुरुपयोग से किसी व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे। राष्ट्रपति ली का यह जोर देना कि किसी निर्दोष व्यक्ति को आरोपी न बनाया जाए, याद दिलाता है कि नए निकायों के प्रदर्शन का आकलन सिर्फ जांच के आंकड़ों से नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही, निकायों के प्रमुखों का राष्ट्रपति की मौजूदगी वाली बैठक में शामिल होना और उनके साथ सीधे दोपहर का भोजन करना इस सवाल को और बड़ा कर सकता है कि व्यवहार में जांच की स्वतंत्रता कैसे सुनिश्चित होगी।

मिसाल के तौर पर, अगर किसी नागरिक के खिलाफ जांच हो, तो उसके लिए सिर्फ यह जानना अहम नहीं है कि जांच किस निकाय के जिम्मे है। यह भी महत्वपूर्ण है कि जांच राजनीतिक हितों से स्वतंत्र होकर हो रही है या नहीं और अन्याय होने पर उसे ठीक करने के लिए कोई नियंत्रण व्यवस्था मौजूद है या नहीं। यह एक काल्पनिक उदाहरण के आधार पर दी गई व्याख्या है; सिर्फ इस खबर के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी नागरिक की जांच प्रक्रिया या राहत पाने का तरीका बदल गया है।

गंभीर अपराध जांच एजेंसी को दी गई हिदायत के लक्ष्य और दायरे को भी ठीक से समझना जरूरी है। सत्तापक्ष-विपक्ष से परे, अधिक पढ़े-लिखे और संपन्न लोगों के अपराधों की बिना हिचक कड़ी जांच करने का अनुरोध गंभीर अपराध जांच एजेंसी से किया गया था। इसे बदलकर यह लिखना कि यही हिदायत तीनों निकायों को दी गई थी, वक्तव्य के लक्ष्य को गलत तरीके से पेश करना होगा।

उच्च पदस्थ अधिकारियों के अपराधों की जांच के कार्यालय के अधिकारों में बदलाव पर चर्चा

उच्च पदस्थ अधिकारियों के अपराधों की जांच का कार्यालय ने डेमोक्रेटिक पार्टी (민주당) द्वारा आगे बढ़ाए जा रहे उच्च पदस्थ अधिकारियों के अपराधों की जांच संबंधी कानून (공수처법) संशोधन विधेयक का विरोध किया। खबरों के अनुसार, विधेयक में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मंत्रियों और सांसदों आदि के खिलाफ जांच करने का इस कार्यालय का अधिकार गंभीर अपराध जांच एजेंसी को सौंपने और इस कार्यालय को न्यायाधीशों, अभियोजकों, जांच अधिकारियों तथा पुलिस की जांच करने देने का प्रावधान है। कानून संशोधन को अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। इस कार्यालय ने तर्क दिया कि गंभीर अपराध जांच एजेंसी और पुलिस, आंतरिक एवं सुरक्षा मंत्रालय (행정안전부) के अधीन हैं और उनके मंत्री की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं; इसलिए केवल राष्ट्रपति की कमान वाली संस्थाओं को जांच का जिम्मा देने से नियंत्रण की व्यवस्था पीछे चली जाएगी।

खबरों में बताया गया कि डेमोक्रेटिक पार्टी उच्च पदस्थ अधिकारियों के अपराधों की जांच के कार्यालय को पूरे देश में काम करने वाले निकाय के रूप में विस्तारित करने के विकल्प पर भी विचार कर रही है, ताकि वह अलग-अलग क्षेत्रों के अभियोजन कार्यालयों, गंभीर अपराध जांच एजेंसियों और पुलिस विभागों पर निगरानी रख सके। इस कार्यालय ने कहा कि इसके लिए जरूरी कर्मचारी और संगठनात्मक ढांचा न हो तो यह काम संभालना मुश्किल होगा। विवाद सिर्फ इस बात पर नहीं है कि अधिकार कहां रखे जाएं, बल्कि इस पर भी है कि उन अधिकारों का वास्तविक इस्तेमाल करने और दूसरे निकायों पर निगरानी रखने की क्षमता कैसे तैयार की जाए।

पुष्ट तथ्य और वे बातें जो अभी अज्ञात हैं

पुष्ट तथ्य

  • अभियोजन कार्यालय और गंभीर अपराध जांच एजेंसी ने 2 अक्टूबर को काम शुरू किया। उनके कार्यवाहक प्रमुख ली जोंग-ह्यॉन और चॉन जोंग-मिन तथा राष्ट्रीय पुलिस एजेंसी के कार्यवाहक प्रमुख किम जोंग-चोल 6 अक्टूबर को मंत्रिमंडल बैठक में शामिल हुए।
  • राष्ट्रपति ली ने कहा कि जांच और अभियोजन अधिकारों का राजनीतिक सत्ता द्वारा दुरुपयोग नहीं होना चाहिए और न ही उनसे किसी व्यक्ति के साथ अन्याय होना चाहिए।
  • सत्तापक्ष-विपक्ष का भेद किए बिना नेतृत्व वर्ग के अपराधों की कड़ी जांच करने का अनुरोध गंभीर अपराध जांच एजेंसी से किया गया था।
  • विपक्ष ने आलोचना की कि यह अभियोग वापस लेने की दिशा में उठाया गया कदम है, जबकि राजनीतिक जगत और कानूनी क्षेत्र में निकायों की स्वतंत्रता कमजोर पड़ने की चिंता जताई गई।
  • उच्च पदस्थ अधिकारियों के अपराधों की जांच का कार्यालय ने उच्च पदस्थ अधिकारियों की जांच शक्तियां गंभीर अपराध जांच एजेंसी को सौंपने वाले कानून संशोधन विधेयक का विरोध किया।

वे बातें जो अभी अज्ञात हैं

  • सार्वजनिक खबरों से यह पता नहीं चलता कि राष्ट्रपति ली ने अभियोजन विभाग द्वारा सत्ता के दुरुपयोग के किन खास मामलों का उल्लेख किया था।
  • उच्च पदस्थ अधिकारियों के अपराधों की जांच संबंधी कानून संशोधन विधेयक और इस कार्यालय को पूरे देश में काम करने वाले निकाय के रूप में विस्तारित करने की योजना पर क्या फैसला होगा, यह अभी तय नहीं है।
  • नए अभियोजन कार्यालय और गंभीर अपराध जांच एजेंसी की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस व्यवस्था या कदम सामने नहीं रखा गया है।

पाठक किन बातों पर नजर रखें

  • उच्च पदस्थ अधिकारियों के अपराधों की जांच संबंधी कानून में संशोधन पर चर्चा के दौरान यह देखना जरूरी है कि जांच के दायरे और अलग-अलग निकायों के अधिकारों के बारे में क्या अंतिम फैसला होता है। अभी तक खबरों में जो बातें आई हैं, वे आगे बढ़ाए जा रहे प्रस्ताव और उच्च पदस्थ अधिकारियों के अपराधों की जांच के कार्यालय का विरोध हैं—वे अंतिम कानून नहीं हैं।
  • नए अभियोजन कार्यालय और गंभीर अपराध जांच एजेंसी के नियमित प्रमुखों की नियुक्ति और उनके संचालन के दौरान यह देखा जा सकता है कि मंत्रिमंडल बैठक में शामिल होने जैसे मामलों में सरकार के साथ उनके संबंधों को कैसे तय किया जाता है।
  • नए निकायों की स्वतंत्रता को लेकर विवाद का आकलन करते समय केवल राजनीतिक दलों के दावों पर नहीं, बल्कि वास्तव में स्थापित किए जाने वाले नियंत्रण के उपायों और जांच अधिकारों के बंटवारे पर भी नजर रखनी चाहिए।

संदर्भ

  • संदर्भित अन्य रिपोर्ट: hani.co.kr