6 अक्टूबर को राष्ट्रीय सभा की विदेश मामलों और एकीकरण समिति (국회 외교통일위원회) की विदेश मंत्रालय (외교부) पर हुई संसदीय जांच में राष्ट्रीय खुफिया सेवा के प्रमुख ली जोंग-सोक के अमेरिका में प्रवेश से इनकार किए जाने के आरोप और वॉशिंगटन स्थित दक्षिण कोरियाई दूतावास में तैनात किए जाने वाले 국정원 कर्मचारियों के वीज़ा में देरी का मुद्दा साथ-साथ उठाया गया। सांसद हान डोंग-हून ने पूछा कि क्या यह सच है कि उनकी जानकारी के अनुसार, ली ने मार्च 2026 के आसपास अमेरिका जाने की कोशिश की थी, लेकिन उनके अमेरिका-विरोधी रुझान आदि के कारण उन्हें प्रवेश से मना कर दिया गया। विदेश मंत्री चो ह्यून ने जवाब दिया, “मेरी जानकारी में ऐसा नहीं है।” इस दावे पर भी कि अमेरिकी अधिकारियों ने ली के पक्ष के अमेरिका-विरोधी रुझान के बारे में पूछताछ की थी, उन्होंने कहा, “बिल्कुल नहीं।”
हालाँकि, चो ने आगे कहा कि अमेरिका-दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्रियों की बैठक में उन्हें खुफिया क्षेत्र की समस्याओं के बारे में जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने विशिष्ट बातें सार्वजनिक नहीं कीं। इस बीच, खबरें आईं कि अमेरिकी सरकार ने वॉशिंगटन स्थित दक्षिण कोरियाई दूतावास में तैनात किए जाने वाले 국정원 कर्मचारियों के वीज़ा जारी करने और उन्हें राजनयिक का दर्जा देने की मंज़ूरी रोक रखी है। 국정원 ने कहा कि कुछ वीज़ा में देरी अमेरिका की सख्त प्रवेश प्रक्रियाओं के तहत व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ी वीज़ा प्रक्रिया का मामला है और इसका अमेरिका-दक्षिण कोरिया के खुफिया सहयोग से कोई संबंध नहीं है।
국정원 प्रमुख के प्रवेश से इनकार किए जाने के आरोप पर मंत्री का खंडन उनकी जानकारी की सीमा के भीतर दिया गया जवाब है। कर्मचारियों के वीज़ा में देरी के कारण और खुफिया सहयोग से जुड़ी समस्या का विशिष्ट विवरण अलग से पुष्ट नहीं हुआ है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
इस संसदीय जांच में दोनों मामलों का ज़िक्र अमेरिका-दक्षिण कोरिया के खुफिया संबंधों के संदर्भ में हुआ, लेकिन तथ्यों और बयान देने वालों के बीच अंतर को ध्यान में रखना ज़रूरी है। ली को अमेरिका में प्रवेश से मना किए जाने का आरोप सांसद ने लगाया था और मंत्री चो ने जवाब दिया कि उनकी जानकारी में यह सच नहीं है। इसलिए, अभी उपलब्ध आधार पर यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि प्रवेश से वास्तव में इनकार किया गया था या अमेरिका ने क्या कारण बताया था।
वीज़ा में देरी के मामले में भी खबरों में दी गई जानकारी और 국정원 की व्याख्या, दोनों मौजूद हैं। एक ओर खबरें आईं कि अमेरिकी सरकार ने वीज़ा जारी करने और राजनयिक का दर्जा देने की मंज़ूरी रोक रखी है; दूसरी ओर, 국정원 ने कुछ देरी को व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ी प्रक्रिया बताते हुए कहा कि इसका खुफिया सहयोग से कोई संबंध नहीं है। मंत्री चो ने कहा कि यह खुफिया एजेंसियों के बीच का मामला है, जिसमें विदेश मंत्रालय शामिल नहीं है।
रिपोर्ट में अमेरिका-दक्षिण कोरिया के खुफिया संबंधों से जुड़े अन्य मुद्दों का भी ज़िक्र किया गया। इनमें यह जानकारी शामिल थी कि अमेरिकी सरकार का मानना है कि 국정원 के निर्देश पर उसने चीन में Coupang (쿠팡) के एक पूर्व कर्मचारी से संपर्क किया और उसका लैपटॉप वापस लिया; उस कर्मचारी पर व्यक्तिगत जानकारी लीक करने का संदेह है। एक अन्य मुद्दा यह था कि एकीकरण मंत्री जोंग डोंग-यंग द्वारा उत्तर कोरिया के यूरेनियम संवर्धन संयंत्र के स्थान का खुलासा किए जाने पर आपत्ति जताते हुए, अमेरिकी सरकार दक्षिण कोरियाई सरकार के साथ उत्तर कोरिया से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा करने पर रोक लगा रही है। मंत्री चो ने भी कहा कि वह यह नहीं बता सकते कि खुफिया क्षेत्र में किस तरह की समस्या है।
संसदीय जांच में अमेरिका-दक्षिण कोरिया के खुफिया मुद्दों के अलावा, उत्तर कोरियाई सेना द्वारा विसैन्यीकृत क्षेत्र में बारूदी सुरंगें बिछाने पर प्रतिक्रिया और यूक्रेन द्वारा उत्तर कोरियाई युद्धबंदियों को वापस भेजने के बारे में सार्वजनिक रूप से की गई घोषणा पर भी चर्चा हुई। चो ने कहा कि सुरंगों के जवाब में क्या किया जाए, यह राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद (국가안전보장회의) में चर्चा के बाद तय किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि विदेश मंत्रालय संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (유엔 안전보장이사회) के अध्यक्षीय वक्तव्य और प्रस्ताव को आगे बढ़ाने तथा पत्र भेजने जैसे विकल्पों पर विचार कर रहा है। एक ही संसदीय जांच में कई विदेश नीति संबंधी मुद्दों पर चर्चा हुई, लेकिन ऐसा कोई आधार पेश नहीं किया गया कि ये मुद्दे 국정원 के वीज़ा मामले का कारण हैं।
इस खबर का मतलब
पाठकों के लिए अहम बात यह है कि ‘प्रवेश से इनकार किए जाने का आरोप’ और ‘कर्मचारियों के वीज़ा में देरी’ अलग-अलग मामले हो सकते हैं। पहला आरोप एक सांसद ने 국정원 प्रमुख की निजी अमेरिका यात्रा के संबंध में लगाया था, जबकि दूसरा मामला तैनात किए जाने वाले कर्मचारियों के वीज़ा और राजनयिक का दर्जा देने की मंज़ूरी से जुड़ी खबर है। दोनों मामलों को अमेरिका-दक्षिण कोरिया के खुफिया संबंधों में संभावित तनाव से जोड़कर देखा जा सकता है, लेकिन अभी सार्वजनिक जानकारी के आधार पर उनके कारण या उनके बीच सीधे संबंध की पुष्टि नहीं की जा सकती।
यदि 국정원 कर्मचारियों की तैनाती वास्तव में टलती है, तो इससे संबंधित कर्मचारियों और दूतावास की कार्ययोजना प्रभावित हो सकती है। हालाँकि, यह नहीं बताया गया कि किस कर्मचारी की प्रक्रिया में कितनी देरी हुई या कामकाज में क्या बदलाव आया। उदाहरण के लिए, यदि तैनाती के लिए निर्धारित कोई कर्मचारी वीज़ा मिलने का इंतज़ार कर रहा हो, तो उसके रवाना होने या पदभार संभालने की समय-सारणी प्रभावित हो सकती है; लेकिन केवल इस सामग्री के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि ऐसा वास्तव में हुआ है।
सरकारों के बीच खुफिया जानकारी साझा करने से जुड़े कई ब्योरे सार्वजनिक नहीं किए जाते। इसलिए केवल इस तथ्य से कि मंत्री ने विशिष्ट समस्या का खुलासा नहीं किया, संबंधों में बिगाड़ या किसी खास कदम की पृष्ठभूमि के बारे में निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। दूसरी ओर, सिर्फ इसलिए कि 국정원 ने इसे खुफिया सहयोग से असंबद्ध बताया है, सभी सवालों के जवाब भी नहीं मिल जाते। आगे यह देखना ज़रूरी होगा कि क्या वीज़ा में देरी का कारण आधिकारिक तौर पर बताया जाता है, खुफिया जानकारी साझा करने पर रोक की खबर के बारे में सरकार क्या रुख अपनाती है, और संबंधित पक्षों के स्पष्टीकरण एक-दूसरे से मेल खाते हैं या नहीं।
पुष्ट तथ्य और जो अब भी अज्ञात है
पुष्ट तथ्य
- विदेश मामलों और एकीकरण समिति ने 6 अक्टूबर को विदेश मंत्रालय आदि के कामकाज की संसदीय जांच की।
- सांसद हान डोंग-हून ने आरोप लगाया कि 국정원 प्रमुख ली जोंग-सोक को मार्च 2026 के आसपास अमेरिका में प्रवेश से मना कर दिया गया था; मंत्री चो ह्यून ने जवाब दिया, “मेरी जानकारी में ऐसा नहीं है।”
- मंत्री चो ने कहा कि उन्हें खुफिया क्षेत्र की समस्या के बारे में जानकारी दी गई थी, लेकिन वह विशिष्ट बातें नहीं बता सकते।
- खबरों के अनुसार, अमेरिकी सरकार ने 국정원 कर्मचारियों के वीज़ा जारी करने और उन्हें राजनयिक का दर्जा देने की मंज़ूरी रोक रखी है। 국정원 ने बताया कि कुछ देरी व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ी प्रक्रिया का मामला है।
- मंत्री चो ने कहा कि सुरंगों के जवाब पर राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद में चर्चा की जाएगी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्तर पर उठाए जाने वाले कदमों पर भी विचार किया जा रहा है।
जो अब भी अज्ञात है
- क्या 국정원 प्रमुख ली जोंग-सोक को वास्तव में अमेरिका में प्रवेश से मना किया गया था और इसकी विशिष्ट परिस्थितियाँ क्या थीं।
- अमेरिकी सरकार ने 국정원 कर्मचारियों के वीज़ा जारी करने और उन्हें राजनयिक का दर्जा देने की मंज़ूरी किस विशिष्ट कारण से रोकी।
- मंत्री चो द्वारा बताई गई खुफिया क्षेत्र की विशिष्ट समस्या क्या थी और उत्तर कोरिया से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा करने पर रोक की खबर में कितनी सच्चाई है।
- क्या 국정원 प्रमुख के प्रवेश से जुड़े आरोप, कर्मचारियों के वीज़ा में देरी और खुफिया जानकारी साझा करने के मुद्दों के बीच कोई सीधा संबंध है।
पाठकों को किन बातों पर नज़र रखनी चाहिए
- आगे दिए जाने वाले स्पष्टीकरणों में यह देखना होगा कि ली की अमेरिका यात्रा और प्रवेश प्रक्रिया से जुड़े तथ्य पुष्ट होते हैं या नहीं।
- वीज़ा में देरी के मामले में, यह अलग-अलग जाँचना होगा कि क्या 국정원 की व्यक्तिगत जानकारी से जुड़ी प्रक्रिया वाली व्याख्या और अमेरिकी सरकार द्वारा मंज़ूरी रोकने के कारण सार्वजनिक किए जाते हैं।
- उत्तर कोरिया से जुड़ी खुफिया जानकारी साझा करने पर रोक की खबर के संबंध में यह देखना उपयोगी होगा कि क्या सरकार रोक की मौजूदगी और उसके दायरे के बारे में आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है और क्या मंत्री चो द्वारा बताई गई खुफिया क्षेत्र की समस्या सार्वजनिक होती है।
संदर्भ
- संदर्भित अन्य रिपोर्ट: koreatimes.co.kr
- संदर्भित अन्य रिपोर्ट: koreatimes.co.kr




















