अमेज़न की सफाई और स्थानीय विरोध
अमेज़न वेब सर्विसेज़ के प्रमुख मैथ गार्मन ने कहा है कि कंपनी ने नई डेटा सेंटर परियोजनाओं की मंज़ूरी माँगते समय सरकारी एजेंसियों के साथ गोपनीयता समझौते करना बंद कर दिया है। ऐसे समझौते को एनडीए कहा जाता है—यह एक कानूनी वादा होता है कि उसमें शामिल लोग कुछ जानकारी दूसरों के साथ साझा नहीं करेंगे।
गार्मन की यह घोषणा डेटा सेंटरों को लेकर बढ़ती सार्वजनिक नाराज़गी के बीच आई है। उन्होंने एक विस्तृत ब्लॉग लेख में इन केंद्रों के बारे में आम चिंताओं का जवाब देने और यह तर्क रखने की कोशिश की कि वे स्थानीय समुदायों के लिए लाभ भी ला सकते हैं।
मुख्य सवाल केवल यह नहीं है कि डेटा सेंटर कितने संसाधन इस्तेमाल करते हैं; सवाल यह भी है कि स्थानीय लोगों को परियोजना की जानकारी कब और कितनी साफ़ तरीके से दी जाती है।
गोपनीयता समझौतों पर उठे सवाल
डेटा सेंटर विरोध में पारदर्शिता एक बड़ा मुद्दा बन गई है। पर्यावरण कार्यकर्ता एरिन ब्रोकोविच ने कहा है कि लोगों की सबसे आम शिकायत यही है कि परियोजना की घोषणा अक्सर तब होती है, जब ज़रूरी मंज़ूरियाँ पहले ही मिल चुकी होती हैं।
उनके बताए पैटर्न में डेवलपरों का स्थानीय लोगों के फोन या सवालों का जवाब न देना और अधिकारियों का पड़ोसियों को जानकारी मिलने से पहले गोपनीयता समझौतों पर हस्ताक्षर करना शामिल है। ऐसे अनुभवों से लोगों को लग सकता है कि उनके इलाके को बदलने वाले फैसले उनसे पूछे बिना लिए जा रहे हैं।
डेटा सेंटर बड़े भवन होते हैं, जिनमें कंप्यूटर सर्वर रखे जाते हैं। ये सर्वर इंटरनेट सेवाओं, ऑनलाइन खरीदारी, वीडियो देखने और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे कामों के लिए जानकारी जमा और संसाधित करते हैं। इसलिए इनके निर्माण से जमीन, पानी, बिजली और आसपास के बुनियादी ढाँचे पर असर पड़ सकता है।
विरोध के बीच प्रस्तावित रोक
न्यूयॉर्क ने बड़े डेटा सेंटरों के लिए नए परमिट जारी करने पर एक साल की रोक की घोषणा की है। परमिट यानी किसी परियोजना को बनाने या चलाने की सरकारी अनुमति।
गार्मन के अनुसार, अमेरिका में 100 से अधिक डेटा सेंटर रोक प्रस्तावित या विचाराधीन हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ये कदम लागू हुए, तो अमेरिका नई तकनीकी क्षमता विकसित करने की दौड़ में पीछे रह सकता है और इसका असर कई पीढ़ियों तक रह सकता है।
गार्मन का तर्क है कि डेटा सेंटर निर्माण रोकने से देश की तकनीकी प्रतिस्पर्धा कमजोर हो सकती है। दूसरी ओर, स्थानीय समुदायों के लिए पानी, बिजली और प्रदूषण के प्रभावों को समझना भी जरूरी है।
पानी के इस्तेमाल पर दावे और सवाल
गार्मन ने डेटा सेंटरों को लेकर चार बड़ी चिंताओं का जवाब देने की कोशिश की: बहुत अधिक पानी का इस्तेमाल, बिजली की कीमतों में बढ़ोतरी, भारी प्रदूषण और समुदायों को पर्याप्त लाभ न मिलना। पानी के मामले में उन्होंने अमेज़न की अपनी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अमेरिका में उद्योगों द्वारा सीधे इस्तेमाल किए जाने वाले पानी में डेटा सेंटरों की हिस्सेदारी 0.5 प्रतिशत है।
उन्होंने इसकी तुलना गोल्फ मैदानों और बादाम की खेती से की, जिनमें भी बड़ी मात्रा में पानी लग सकता है। हालांकि, सीधे डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले पानी का आँकड़ा पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। बिजली बनाने और कंप्यूटर चिप तैयार करने में भी पानी लगता है, इसलिए उन प्रक्रियाओं को शामिल किए बिना कुल प्रभाव का अनुमान अधूरा हो सकता है।
एनविडिया ने हाल में कहा था कि वह डेटा सेंटर के भीतर पानी का इस्तेमाल लगभग पूरी तरह खत्म कर रही है। लेकिन इस तरह के दावे पर भी सवाल उठे हैं, क्योंकि बिजली उत्पादन और चिप निर्माण में लगने वाला पानी अक्सर इस गणना से बाहर रह सकता है।
आँकड़ों की तुलना आसान क्यों नहीं
वैज्ञानिकों का कहना है कि डेटा सेंटरों के पानी और ऊर्जा इस्तेमाल का स्वतंत्र अध्ययन जरूरी है। अमेरिका में तकनीकी कंपनियों के लिए इन आँकड़ों को एक समान तरीके से सार्वजनिक करने की संघीय या राज्य-स्तरीय अनिवार्य व्यवस्था नहीं है।
इसका मतलब है कि अलग-अलग कंपनियों के आँकड़ों की सीधी तुलना करना मुश्किल हो सकता है। जैसे किसी घर के बिजली बिल में केवल रसोई के उपकरणों की खपत गिनकर पूरे घर की ऊर्जा जरूरत नहीं समझी जा सकती, वैसे ही केवल सर्वर भवन के भीतर का पानी गिनने से पूरी आपूर्ति-श्रृंखला का प्रभाव सामने नहीं आता।
बिजली की कीमत: कारणों पर मतभेद
गार्मन ने कहा कि जिन राज्यों में डेटा सेंटरों की संख्या अधिक है, वहाँ बिजली की कीमतें हर जगह एक जैसी नहीं बढ़ीं। उनके मुताबिक, कुछ जगह कीमतें बढ़ी हैं, जबकि कुछ अन्य जगहों पर वे घटी हैं या पहले की तुलना में धीरे बढ़ी हैं।
उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जहाँ बिजली महँगी हुई है, वहाँ एक प्रमुख वजह पुराना बिजली ढाँचा हो सकता है, जिसका विस्तार और रखरखाव मांग बढ़ने से पहले पर्याप्त रूप से नहीं किया गया। बिजली का ढाँचा यानी बिजलीघर, तारों का जाल और वह व्यवस्था जो बिजली को घरों और कारखानों तक पहुँचाती है।
लेकिन एक स्वतंत्र निगरानी संस्था ने हाल में कहा कि अमेरिका के सबसे बड़े बिजली नेटवर्क में साल-दर-साल 76 प्रतिशत की कीमत वृद्धि के पीछे डेटा सेंटर मुख्य कारण थे। यह दावा अमेज़न के तर्क से अलग तस्वीर पेश करता है और दिखाता है कि बिजली की कीमत पर डेटा सेंटरों का असर अभी विवाद का विषय है।
- डेटा सेंटरों को लगातार और भरोसेमंद बिजली चाहिए, क्योंकि ऑनलाइन सेवाएँ दिन-रात चलती हैं।
- नई मांग पूरी करने के लिए बिजली नेटवर्क को मजबूत करना पड़ सकता है, जिसकी लागत का बँटवारा उपभोक्ताओं और कंपनियों के बीच कैसे होगा, यह अहम सवाल है।
- किसी क्षेत्र में कीमतें बढ़ने के पीछे कई कारण हो सकते हैं; इसलिए अलग-अलग इलाकों के आँकड़ों और समयावधि की जाँच जरूरी है।
प्रदूषण और आपातकालीन जनरेटर
प्रदूषण को लेकर गार्मन ने कहा कि आलोचक अक्सर उन अधिकतम सीमाओं पर ध्यान देते हैं, जिनकी अनुमति किसी डेटा सेंटर के परमिट में दी गई होती है। उदाहरण के तौर पर, टेक्सास में प्रस्तावित एक अमेज़न डेटा सेंटर को सालाना 3.3 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड छोड़ने की अनुमति दी गई है। कार्बन डाइऑक्साइड वह गैस है जो वातावरण में गर्मी रोककर जलवायु परिवर्तन में योगदान देती है।
यह मात्रा अमेरिका के किसी भी अन्य बिजलीघर की तुलना में अधिक बताई गई है। हालांकि, परमिट में दी गई अधिकतम सीमा और वास्तविक उत्सर्जन एक ही चीज़ नहीं हैं। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि केंद्र के उपकरण कितनी बार चलते हैं, किस ईंधन का इस्तेमाल होता है और प्रदूषण मापने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।
गार्मन का कहना है कि डेटा सेंटरों के बिजली जनरेटर लगभग कभी नहीं चलते और वे 99.9 प्रतिशत समय बंद रहते हैं। उनके मुताबिक, ये जनरेटर साल में करीब 10 घंटे चलते हैं, अधिकतर जरूरी रखरखाव जाँच के लिए।
यह मुद्दा व्यापक चिंता का हिस्सा है: यदि जनरेटर कम चलते हैं, तो वास्तविक प्रदूषण परमिट की अधिकतम सीमा से कम हो सकता है; लेकिन इस दावे की पुष्टि के लिए नियमित और सार्वजनिक निगरानी जरूरी होगी। प्रदूषण को लेकर एक अलग विवाद में एनएएसीपी ने एलन मस्क की स्पेसएक्स और एक्सएआई के खिलाफ मुकदमा भी दायर किया है।
परमिट में लिखी संभावित अधिकतम सीमा अपने-आप में वास्तविक उत्सर्जन का प्रमाण नहीं होती। वास्तविक प्रभाव जानने के लिए संचालन के आँकड़े और स्वतंत्र निगरानी चाहिए।
समुदायों को मिलने वाले लाभ
गार्मन ने कहा कि पिछले तीन वर्षों में अमेज़न ने उन अमेरिकी समुदायों के लिए एक अरब डॉलर से अधिक का योगदान दिया है, जहाँ कंपनी की डेटा सेंटर मौजूदगी महत्वपूर्ण है। उन्होंने गोपनीयता समझौतों का इस्तेमाल बंद करने की घोषणा को भी समुदायों के साथ संबंध सुधारने की कोशिश के रूप में पेश किया।
स्थानीय लाभ केवल आर्थिक योगदान तक सीमित नहीं होते। किसी परियोजना से निर्माण के दौरान रोजगार, स्थानीय सेवाओं की खरीद और कर राजस्व मिल सकता है; वहीं लोगों के लिए यह जानना भी जरूरी है कि स्थायी नौकरियाँ कितनी होंगी, सार्वजनिक संसाधनों पर कितना दबाव पड़ेगा और लाभ किसे मिलेगा।
इसलिए समुदायों के सामने व्यावहारिक सवाल हैं: क्या परियोजना से स्थानीय लोगों को लंबे समय का रोजगार मिलेगा? बिजली और पानी की लागत पर असर कौन उठाएगा? और यदि पर्यावरण या स्वास्थ्य पर नुकसान होता है, तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी?
भरोसा जीतना सबसे बड़ी चुनौती
अमेज़न की घोषणा से गोपनीयता पर एक ठोस सवाल का जवाब मिलता है, लेकिन इससे लोगों का संदेह अपने-आप दूर होगा, यह तय नहीं है। एंथ्रोपिक के प्रमुख डारियो अमोदेई ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर बढ़ते विरोध को मूल रूप से भरोसे का संकट बताया है। उनका कहना है कि कई लोगों को आशंका रहती है कि सरकारें और तकनीकी कंपनियाँ उनके हितों के खिलाफ फैसले कर सकती हैं।
लेखिका जैस्मिन सन ने भी कहा है कि जब डेटा सेंटरों का विरोध करने वाले लोगों के सामने तकनीकी कंपनियों के तर्क रखे जाते हैं, तो उनकी आम प्रतिक्रिया होती है: “मुझे उन पर भरोसा नहीं है।” यह प्रतिक्रिया बताती है कि केवल आश्वासन देना काफी नहीं; दावों को जाँचने योग्य जानकारी से जोड़ना होगा।
आगे किन बातों पर नजर रहेगी
डेटा सेंटरों के विस्तार पर बहस आने वाले समय में और तेज हो सकती है, खासकर जब कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ऑनलाइन सेवाओं के लिए कंप्यूटिंग क्षमता की मांग बढ़ रही है। परियोजनाओं को लेकर पारदर्शिता, पानी और बिजली के पूरे इस्तेमाल का हिसाब, वास्तविक प्रदूषण के आँकड़े और स्थानीय लाभों का स्पष्ट ब्योरा इस बहस के केंद्र में रहेंगे।
जवाबदेही के लिए जरूरी कदम
- कंपनियाँ परियोजना की जानकारी और पर्यावरणीय प्रभाव का विवरण मंज़ूरी से पहले सार्वजनिक करें।
- पानी, बिजली और उत्सर्जन की गणना में केवल डेटा सेंटर के भीतर का इस्तेमाल नहीं, बल्कि बिजली उत्पादन और चिप निर्माण जैसे जुड़े चरण भी शामिल हों।
- वास्तविक उपयोग और प्रदूषण के आँकड़ों की स्वतंत्र जाँच हो और उन्हें नियमित रूप से जनता के सामने रखा जाए।
- स्थानीय समुदायों को फैसलों पर प्रतिक्रिया देने और सवाल पूछने का पर्याप्त समय मिले।
अमेज़न का कहना है कि डेटा सेंटर समुदायों के लिए लाभकारी हो सकते हैं और कंपनी अब सरकारी एजेंसियों के साथ गोपनीयता समझौते नहीं करती। लेकिन अंतिम भरोसा इस बात से बनेगा कि कंपनी और सरकारें अपने दावों को कितनी खुली जानकारी, स्वतंत्र जाँच और स्थानीय लोगों की भागीदारी से साबित करती हैं।



















