जैक डोर्सी द्वारा बनाया गया विकेंद्रीकृत मैसेजिंग ऐप Bitchat भारत के Apple App Store और Google Play से गायब हो गया। डोर्सी ने शनिवार को कहा कि भारत सरकार ने Apple को भारत के App Store से Bitchat हटाने का आदेश दिया था। X पर उनके द्वारा पोस्ट की गई Apple की सूचना में कहा गया कि भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (전자정보기술부) ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (정보기술법) की धारा 69A के तहत इसे हटाने की मांग की थी।

Apple ने सूचना दी कि Bitchat भारत के बाहर App Store पर उपलब्ध रहेगा, लेकिन भारत में TestFlight बीटा सेवा (테스트플라이트 베타 서비스) के ज़रिए भी उपलब्ध नहीं होगा। Google Play से भी Bitchat डाउनलोड नहीं किया जा सकता था, लेकिन इसकी पुष्टि नहीं हुई कि केंद्र सरकार ने Google या इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को इसे ब्लॉक करने का निर्देश दिया था या नहीं।

पृष्ठभूमि और संदर्भ

Bitchat पिछले साल जुलाई में लॉन्च हुआ था। इसे ब्लूटूथ मेश नेटवर्किंग—यानी ऐसी व्यवस्था जिसमें आसपास के उपकरण आपस में जुड़कर संदेश आगे भेजते हैं—के ज़रिए इस तरह बनाया गया है कि आसपास के उपकरण मोबाइल नेटवर्क, इंटरनेट या केंद्रीय सर्वर पर निर्भर हुए बिना एन्क्रिप्टेड संदेशों का आदान-प्रदान कर सकें। इसलिए सामान्य इंटरनेट कनेक्शन बंद होने पर भी काम कर पाना इस ऐप की एक प्रमुख विशेषता है।

Bitchat को लेकर भारतीय अधिकारियों की यह पहली कार्रवाई नहीं है। डोर्सी ने बताया था कि जुलाई 2026 में भारतीय अधिकारियों ने Bitchat से संबंधित ओपन-सोर्स रिपॉज़िटरी को GitHub से हटाने का आदेश दिया था। उस समय बताया गया था कि सरकार ने इस आदेश के लिए Bitchat की संरचना का हवाला दिया था: इसके कारण जांच एजेंसियों के लिए संचार को इंटरसेप्ट करना या उपयोगकर्ताओं का पता लगाना मुश्किल हो सकता है, और इंटरनेट बंद रहने के दौरान भी ऐप काम कर सकता है।

दोनों कार्रवाइयों के कानूनी आधार एक जैसे नहीं हैं। GitHub से संबंधित आदेश कथित तौर पर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के उस प्रावधान के तहत दिया गया था जो मध्यस्थों और तीसरे पक्ष की सामग्री के दायित्वों से जुड़ा है। इसके विपरीत, इस बार Apple की सूचना में ऑनलाइन जानकारी को ब्लॉक करने से संबंधित धारा 69A का उल्लेख किया गया। अलग-अलग कानूनी प्रावधानों का हवाला यह दिखाता है कि एक ही ऐप के संबंध में कार्रवाई करते हुए भी सरकार द्वारा बताए गए कानूनी आधार और कार्रवाई के लक्ष्य अलग-अलग हो सकते हैं।

इस ख़बर का क्या अर्थ है

मुद्दा सिर्फ़ यह नहीं है कि ऐप एन्क्रिप्टेड संदेश भेजता है, बल्कि यह भी है कि इंटरनेट कनेक्शन बंद होने के बाद भी संचार जारी रख पाने की उसकी सुविधा को सरकार किस कानूनी आधार पर सीमित कर सकती है। इंटरनेट स्वतंत्रता फ़ाउंडेशन (인터넷자유재단) का तर्क है कि धारा 69A केवल गैरकानूनी जानकारी को ब्लॉक करने की अनुमति देती है, और यह किसी मैसेजिंग ऐप को सिर्फ़ इसलिए ब्लॉक करने का आधार नहीं बनती कि वह इंटरनेट बंद होने के दौरान भी काम कर सकता है। फ़ाउंडेशन ने नवीनतम आदेश को असंवैधानिक बताते हुए उसकी आलोचना की। यह संगठन का कानूनी तर्क है; इसका अर्थ यह नहीं है कि किसी अदालत ने इसे असंवैधानिक ठहराया है।

इंटरनेट बंद होने की समस्या का असर केवल Bitchat के उपयोगकर्ताओं तक सीमित नहीं है। अगर अधिकारी किसी विशेष क्षेत्र में इंटरनेट सेवा रोकते हैं, तो सामान्य ऑनलाइन संचार भी बाधित हो सकता है। इंटरनेट कनेक्शन के बिना काम करने के लिए बनाए गए ऐप उस स्थिति में संचार के वैकल्पिक साधन बन सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार की चिंता यह है कि ऐसी सुविधाओं के कारण जांच एजेंसियों के लिए संचार को इंटरसेप्ट करना या उपयोगकर्ताओं का पता लगाना मुश्किल हो सकता है। इस बहस का केंद्र यह है कि संचार जारी रखने की क्षमता और जांच तथा नियमन की ज़रूरतों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

उदाहरण के लिए, अगर किसी प्रदर्शन वाले इलाके में इंटरनेट सेवा बंद कर दी जाए और वहां मौजूद लोगों ने Bitchat पहले से इंस्टॉल किया हो, तो वे आसपास के उपकरणों के ज़रिए संदेशों का आदान-प्रदान कर सकते हैं। यह ऐप की बनावट के आधार पर संभव स्थिति का उदाहरण है; इससे यह पुष्टि नहीं होती कि किसी वास्तविक प्रदर्शन में किसने कौन-से संदेश भेजे या प्राप्त किए।

यह बहस ऐसे समय में सामने आई है जब प्रदर्शन और इंटरनेट बंद होने की घटनाएं एक-दूसरे से जुड़ी हैं। अधिकारियों ने शुक्रवार को नई दिल्ली के जंतर-मंतर के आसपास 12 घंटे के लिए इंटरनेट सेवा बंद कर दी। ख़बर के अनुसार, जुलाई में हुए प्रदर्शन के दौरान भी इंटरनेट सेवा बंद होने के बाद प्रदर्शनकारियों ने Bitchat और इसके प्रतिस्पर्धी ऐप Briar का इस्तेमाल किया था। Sensor Tower के आंकड़ों के अनुसार, 17 से 23 जुलाई के बीच दुनिया भर में Bitchat के कुल डाउनलोड में भारत की हिस्सेदारी लगभग 85% थी, जो इससे ठीक पहले के 30 दिनों में लगभग 1% थी।

संबंधित व्यवस्था और सहायता जानकारी

भारतीय अधिकारियों की इस कार्रवाई में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (정보기술법) की धारा 69A का हवाला दिया गया। इंटरनेट स्वतंत्रता फ़ाउंडेशन (인터넷자유재단) इस प्रावधान को गैरकानूनी जानकारी ब्लॉक करने का आधार मानता है और उसका तर्क है कि केवल ऐप के काम करने के तरीके के कारण उसे ब्लॉक करने की अनुमति नहीं है। फ़ाउंडेशन ने कहा कि ब्लॉक करने का पूरा आदेश और कथित तौर पर कार्रवाई का आधार बनी सामग्री सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि सरकार ने किस सामग्री पर आपत्ति जताई या यह कार्रवाई कानूनी रूप से उचित थी या नहीं।

आंतरिक कानूनी मार्गदर्शिका L1 दक्षिण कोरिया की संवैधानिक न्यायनिर्णयन प्रक्रिया से संबंधित सामग्री है। इस मार्गदर्शिका के अनुसार, अधिकार-विवाद न्यायनिर्णयन (권한쟁의심판) वह प्रक्रिया है जिसमें कोई पक्ष—जैसे कोई राष्ट्रीय संस्था या स्थानीय सरकार—यह दावा करता है कि उसके अधिकार का उल्लंघन हुआ है या उल्लंघन का खतरा है; कोई व्यक्ति यह याचिका दायर नहीं कर सकता। याचिका उस आधार का पता चलने की तारीख से 60 दिनों के भीतर और आधार उत्पन्न होने की तारीख से 180 दिनों के भीतर दायर की जानी चाहिए। यह दक्षिण कोरियाई कानूनी व्यवस्था के बारे में जानकारी है, इसलिए इसे भारत में Bitchat को ब्लॉक करने के खिलाफ़ आपत्ति दर्ज करने की प्रक्रिया या शर्तों के रूप में लागू नहीं किया जाना चाहिए। उपलब्ध ख़बरों से यह पुष्टि नहीं होती कि इस मामले में कौन और किस तरह की कानूनी कार्रवाई कर सकता है।

पुष्ट तथ्य और जो अभी अज्ञात है

पुष्ट तथ्य

  • डोर्सी ने कहा कि भारत सरकार ने Apple से Bitchat हटाने की मांग की थी, और पोस्ट की गई Apple की सूचना में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (정보기술법) की धारा 69A का उल्लेख था।
  • Apple ने सूचना दी कि भारत में ऐप स्टोर के साथ-साथ TestFlight के ज़रिए भी ऐप का इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।
  • Bitchat को ब्लूटूथ मेश नेटवर्किंग के ज़रिए इस तरह बनाया गया है कि आसपास के उपकरण इंटरनेट या केंद्रीय सर्वर के बिना एन्क्रिप्टेड संदेशों का आदान-प्रदान कर सकें।
  • Bitchat को भारत के Google Play से डाउनलोड नहीं किया जा सकता था, और कई इंटरनेट सेवा प्रदाताओं के नेटवर्क पर इसकी वेबसाइट भी नहीं खुल रही थी।
  • इंटरनेट स्वतंत्रता फ़ाउंडेशन ने नवीनतम आदेश की असंवैधानिक बताते हुए आलोचना की और कहा कि आदेश तथा कथित तौर पर उसका आधार बनी गैरकानूनी सामग्री को सार्वजनिक नहीं किया गया था।

जो अभी अज्ञात है

  • क्या भारत सरकार ने Google या इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को भी Bitchat ब्लॉक करने का निर्देश दिया था।
  • ब्लॉक करने की कार्रवाई का आधार बताई गई सामग्री का विशिष्ट विवरण।
  • क्या Apple, Google या Bitchat कानूनी कार्रवाई करेंगे।
  • क्या कई संचार नेटवर्क पर Bitchat की वेबसाइट का न खुलना सरकारी निर्देश के कारण था।

पाठकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

  • भारत में Bitchat का इस्तेमाल करने या उसे डाउनलोड करने के इच्छुक पाठकों को Apple की सूचना देखनी चाहिए, क्योंकि Apple App Store, Google Play और TestFlight पर ऐप की उपलब्धता की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
  • ऐप या वेबसाइट न खुलने पर पुष्ट तथ्यों और उसके कारण के बीच अंतर करना चाहिए। मौजूदा ख़बरों के आधार पर यह नहीं पता कि सरकार ने Google और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को निर्देश दिए थे या नहीं।
  • कानूनी कार्रवाई की संभावना पर विचार करते समय इंटरनेट स्वतंत्रता फ़ाउंडेशन के असंवैधानिकता संबंधी तर्क को अदालत के फ़ैसले के साथ नहीं मिलाना चाहिए। उपलब्ध सामग्री में भारतीय अधिकारियों का पूरा आदेश या कार्रवाई की विशिष्ट प्रक्रिया शामिल नहीं है।

संदर्भ