राष्ट्रपति ली जे-म्युंग की मध्यमार्गी और व्यावहारिक नीति के जरिए अपना दायरा बढ़ाने के साथ-साथ पारंपरिक समर्थक आधार को फिर से एकजुट करने की कोशिश में सरकार और सत्तारूढ़ दल की राजनीतिक रणनीति कसौटी पर है। बताया गया कि पिछले अगस्त में डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ कोरिया (더불어민주당) के नए नेतृत्व के साथ रात्रिभोज में उन्होंने कहा था, “हमने वामपंथ का बहुत ज्यादा ध्यान नहीं रखा।” इसके बाद नियुक्तियों और अभियोजन-सुधार को लेकर बहस जारी रही। एक जनमत सर्वेक्षण में शासन के प्रदर्शन के प्रति सकारात्मक आकलन में उछाल आया, लेकिन केवल उस आंकड़े से स्थिर सुधार या समर्थक आधार की एकजुटता की पुष्टि नहीं की जा सकती।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
पदभार संभालने के बाद से राष्ट्रपति ली ने मध्यमार्गी और व्यावहारिक नीति पर जोर देकर अपना समर्थन आधार बढ़ाया है। लेकिन अगर पारंपरिक समर्थकों को लगे कि उनकी नीतियों और नियुक्तियों में उन्हें पर्याप्त महत्व नहीं दिया जा रहा, तो व्यापक मतदाता आधार तक पहुंच और आंतरिक एकजुटता—दोनों हासिल करना मुश्किल हो सकता है। लेख में उद्धृत डेमोक्रेटिक पार्टी के एक नेता ने कहा कि राष्ट्रपति ली ‘दुविधा’ में हैं, क्योंकि उनके लिए मध्यमार्गी मतदाताओं और पारंपरिक समर्थकों—दोनों का ध्यान रखना कठिन है।
वामपंथ की ओर झुकाव वाले संदेश की व्याख्या भी अलग-अलग हुई। इंस्टीट्यूट फॉर द स्पिरिट ऑफ द एज (시대정신연구소) के निदेशक उम क्यॉंग-यॉंग ने इसे व्यवहार में मध्यमार्गी विस्तार छोड़ने की घोषणा के समान बताया। यह एक विशेषज्ञ का आकलन है; अपने-आप में यह वास्तविक मतदाता बदलाव का प्रमाण नहीं है। चिंता का विषय यह है कि जब ‘सभी का राष्ट्रपति’ बनने का संदेश और किसी खास राजनीतिक खेमे को प्राथमिकता देने का संकेत एक साथ दिया जाए, तो मतदाताओं के बीच भ्रम पैदा हो सकता है।
नियुक्तियों और अभियोजन-सुधार पर बहस ने इस तनाव को ठोस टकराव के रूप में सामने ला दिया। प्रगतिशील खेमे को साथ लाने के उद्देश्य से सुर्खियों में आईं बेसिक इनकम पार्टी (기본소득당) की सांसद योंग ह्ये-इन को लैंगिक समानता एवं परिवार मंत्रालय (성평등가족부) का मंत्री पद का उम्मीदवार नामित किया गया था, लेकिन विभिन्न विवादों के बीच उन्होंने इस्तीफा दे दिया। उपलब्ध खबरों के आधार पर यह पता नहीं चलता कि उम्मीदवार के इस्तीफे का समर्थक आधार को एकजुट करने पर वास्तव में क्या असर पड़ा।
अभियोजन-सुधार के मामले में सुधार की दिशा और वादे पर अमल हुआ या नहीं—ये बहस के केंद्र में रहे। लेखक यू सी-मिन ने 22 सितंबर को यूट्यूब प्रसारण में कहा कि अभियोजन-सुधार की योजना के बारे में राष्ट्रपति ली की व्याख्या से वह स्तब्ध थे। उन्होंने ‘राष्ट्रपति ने अब तक जनता को धोखा दिया है’ जैसी अभिव्यक्ति का भी इस्तेमाल किया। खबर के मुताबिक, राष्ट्रपति कार्यालय (청와대) ने जवाब दिया कि उसने जांच और अभियोजन करने वाली संस्थाओं को अलग करने की योजना को अभियोजन संगठन के भीतर भूमिकाओं के बंटवारे की तरह समझाया था। दोनों पक्षों की नोकझोंक पर इसलिए ध्यान दिया जा रहा है कि इससे केवल सुधार की गति ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति ने जिस सुधार का वर्णन किया और वास्तविक योजना क्या है—इसे लेकर अविश्वास भी बढ़ सकता है।
इस खबर का मतलब
मुद्दा केवल यह नहीं है कि वाम या दक्षिण—किस ओर का चुनाव किया जाए। मध्यमार्गी मतदाताओं के लिए व्यावहारिक नीति और पारंपरिक समर्थकों की अपेक्षा के अनुरूप सुधार तथा नियुक्तियों की दिशा—इन दोनों को साथ-साथ कैसे समझाया और लागू किया जाए, यह सरकार और सत्तारूढ़ दल के सामने चुनौती बनकर उभरा है। अगर संदेश, नियुक्तियों और नीतियों की दिशा को अलग-अलग तरह से समझा जाए, तो मध्यमार्गी मतदाताओं के मन में नीति की निरंतरता को लेकर और पारंपरिक समर्थकों के मन में वादे पूरे होने को लेकर सवाल बढ़ सकते हैं। हालांकि, यह खबरों में सामने आई बहस से निकली एक संभावना है; इसका अर्थ यह नहीं कि किसी खास मतदाता समूह की प्रतिक्रिया की पुष्टि हो चुकी है।
जनमत सर्वेक्षण के आंकड़ों को समूहों के हिसाब से अलग-अलग समझना भी जरूरी है। मीडिया टमाटो (미디어토마토) के सर्वेक्षण में डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों में से 63.6% ने लेखक यू की आलोचना को ‘बिना आधार राष्ट्रपति को अस्थिर करने की कोशिश’ माना, जबकि 28.7% ने इसे ‘स्वस्थ आलोचना’ कहा। इसके उलट, सभी उत्तरदाताओं में 58.0% ने इसे ‘स्वस्थ आलोचना’ और 30.9% ने ‘राष्ट्रपति को अस्थिर करने की कोशिश’ माना। यह स्पष्ट है कि डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों और सभी उत्तरदाताओं के जवाब अलग थे, लेकिन केवल इस अंतर के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि पार्टी के सभी समर्थक एक ही सोच रखते हैं या आलोचना ने समर्थन दर को प्रभावित किया।
उदाहरण के लिए, अगर कोई मतदाता मध्यमार्गी और व्यावहारिक नीति का समर्थन करते हुए अभियोजन-सुधार के वादे पर अमल को भी अहम मानता है, तो वह सरकार के संदेशों के साथ-साथ वास्तविक संस्थागत रूपरेखा और नियुक्तियों के फैसलों पर भी गौर कर सकता है। यह किसी खास मतदाता के वास्तविक व्यवहार के बारे में दावा नहीं, बल्कि यह दिखाने वाली एक काल्पनिक मिसाल है कि अलग-अलग मुद्दे किसी एक व्यक्ति के फैसले में एक साथ शामिल हो सकते हैं।
समर्थन दर और आंतरिक मतभेदों के एक-दूसरे को प्रभावित करने की संभावना भी है। योंगिन विश्वविद्यालय के प्रोफेसर चोई चांग-र्योल ने राष्ट्रपति की समर्थन दर में गिरावट और राजनीतिक खेमे के भीतर दरार को एक-दूसरे को बढ़ाने वाला दुष्चक्र बताया और कहा कि समर्थन दर में सुधार से आंतरिक आलोचना कम हो सकती है। दूसरी ओर, उम ने कहा कि राजनीतिक संदेशों के जरिए समर्थन खो चुके मतदाताओं को वापस लाना मुश्किल हो सकता है। दोनों आकलन सुधार की शर्तों को अलग-अलग कोणों से देखते हैं, लेकिन यह जानने के लिए आगे के घटनाक्रम पर नजर रखनी होगी कि किसका अनुमान सही साबित होता है।
पुष्ट तथ्य और जो अभी पता नहीं है
पुष्ट तथ्य
- रियलमीटर (리얼미터) ने एनर्जी इकोनॉमी अखबार (에너지경제신문) के अनुरोध पर 21–23 सितंबर को देशभर में 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के 1508 लोगों का सर्वेक्षण किया। नतीजे में शासन के प्रदर्शन के प्रति सकारात्मक आकलन 37.9% रहा, जो पिछले सप्ताह से 3.1 प्रतिशत अंक अधिक था।
- मीडिया टमाटो (미디어토마토) ने न्यूज टमाटो (뉴스토마토) के अनुरोध पर 25–26 सितंबर को देशभर में 18 वर्ष और उससे अधिक आयु के 1040 लोगों का सर्वेक्षण किया। लेखक यू की आलोचना के आकलन में डेमोक्रेटिक पार्टी के समर्थकों और सभी उत्तरदाताओं के बीच अंतर दिखाई दिया।
- योंग ह्ये-इन ने विभिन्न विवादों के बीच इस्तीफा दे दिया। अभियोजन-सुधार की योजना को लेकर लेखक यू की आलोचना और राष्ट्रपति कार्यालय का जवाब भी खबरों में आया।
- सांसद किम योंग-मिन ने किम जी-योंग को गंभीर अपराध जांच एजेंसी (중대범죄수사청) के प्रमुख पद का उम्मीदवार नामित किए जाने का फैसला वापस लेने की मांग की। इसके बाद, विधायी और न्यायिक मामलों की समिति (법제사법위원회) में सदस्यता-परिवर्तन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सुधार करने वालों को नुकसान पहुंचाना या समिति की सदस्यता जबरन बदलना उचित नहीं है।
- बाद की खबरों में बताया गया कि किम उम्मीदवार के नामांकन को लेकर सत्तारूढ़ खेमे का विरोध जारी रहा और सांसद पाक जी-वॉन ने संसदीय दल की बैठक में प्रस्ताव दिया कि पार्टी का रुख मतदान के जरिए तय किया जाए।
जो अभी पता नहीं है
- इन खबरों से यह पुष्टि नहीं होती कि राष्ट्रपति ली की समर्थन दर में इसके बाद लगातार सुधार हुआ या नहीं।
- यह भी स्पष्ट नहीं है कि योंग ह्ये-इन के इस्तीफे और अभियोजन-सुधार पर बहस का समर्थक आधार को एकजुट करने पर वास्तव में क्या असर पड़ा।
- उपलब्ध सर्वेक्षणों के आधार पर यह तय करना कठिन है कि समर्थन दर में एक बार की बढ़ोतरी अस्थायी उतार-चढ़ाव थी या स्थिर रुझान की शुरुआत।
पाठक किन बातों पर गौर करें
- आगे के जनमत सर्वेक्षण देखते समय यह जांचना चाहिए कि सर्वेक्षण की तारीखें, उत्तरदाताओं का समूह और प्रश्नों की विषयवस्तु समान हैं या नहीं। दोनों सर्वेक्षणों का समय और नमूना अलग-अलग है, इसलिए केवल आंकड़ों की सीधी तुलना करना कठिन है।
- रियलमीटर सर्वेक्षण में उत्तर देने की दर 3.8% थी और 95% विश्वास स्तर पर नमूना त्रुटि ±2.5 प्रतिशत अंक थी। मीडिया टमाटो सर्वेक्षण में उत्तर देने की दर 2.3% और नमूना त्रुटि ±3.0 प्रतिशत अंक थी। नमूना त्रुटि यह बताती है कि नमूने के आधार पर सर्वेक्षण के नतीजे किस सीमा तक बदल सकते हैं, इसलिए छोटे अंतर को निश्चित जनमत परिवर्तन मान लेना उचित नहीं है।
- किम जी-योंग की उम्मीदवारी से जुड़े विवाद और अभियोजन-सुधार की योजना पर खबरों में आई आलोचना और जवाब को अलग-अलग देखना जरूरी है। खास तौर पर, नियुक्ति का मुद्दा और सुधार की विषयवस्तु आगे चलकर किन फैसलों और व्याख्याओं का रूप लेती है—यह ऐसा सवाल है जिसका मौजूदा सामग्री में जवाब नहीं है।
संदर्भ
- संदर्भित अन्य रिपोर्ट: chosun.com




















