मुख्य न्यायाधीश जो ही-डे ने 6 अक्टूबर को होने वाली नेशनल असेंबली (국회) की विधि एवं न्याय समिति (국회 법제사법위원회) की सुप्रीम कोर्ट (대법원) संबंधी राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा में सामान्य गवाह के रूप में पेश न होने का कारण बताते हुए पत्र दिया। मुख्य न्यायाधीश जो ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के उम्मीदवार के नामांकन प्रस्ताव के अधिकार के इस्तेमाल से संबंधित गवाही शक्तियों के पृथक्करण और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के विरुद्ध हो सकती है, और मौजूदा नियुक्ति प्रक्रिया तथा राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत का ब्योरा देना भी कठिन है। डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ कोरिया ने आलोचना की कि उन्होंने नेशनल असेंबली की वैध निगरानी माँग को ठुकराया है, जबकि पीपुल पावर पार्टी ने जवाब में डेमोक्रेटिक पार्टी की कार्रवाई को ‘धमकाने की राजनीति’ कहा।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
28 सितंबर को विधि एवं न्याय समिति ने डेमोक्रेटिक पार्टी की अगुवाई में मुख्य न्यायाधीश जो को राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा में सामान्य गवाह के रूप में बुलाने का निर्णय लिया। उसी दिन काम पर जाते समय मुख्य न्यायाधीश जो ने कहा था कि वह राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा में इस बारे में बात करेंगे कि उन्होंने राष्ट्रपति कार्यालय (청와대) के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के उम्मीदवार को फिर से नामित करने के अनुरोध को क्यों ठुकराया। डेमोक्रेटिक पार्टी के समिति-सचिव किम ई-ग्यॉम ने बताया कि मुख्य न्यायाधीश जो ने 4 अक्टूबर को गैरहाज़िरी का कारण बताते हुए पत्र सौंपा है और आलोचना की कि यह उनके पहले के बयान से अलग है।
गैरहाज़िरी के कारण-पत्र में लिखे गए तर्कों की खबरों में जानकारी दी गई है। मुख्य न्यायाधीश जो ने दावा किया कि नामांकन प्रस्ताव का अधिकार संविधान के तहत मुख्य न्यायाधीश का स्वतंत्र अधिकार है और नेशनल असेंबली द्वारा उनसे इस बारे में गवाही माँगना शक्तियों के पृथक्करण के उद्देश्य और न्यायिक शक्ति की स्वतंत्रता के विपरीत है। उन्होंने यह भी कहा कि उम्मीदवारों की निजी जानकारी, जारी नियुक्ति प्रक्रिया और राष्ट्रपति के साथ हुई बातचीत का ब्योरा सार्वजनिक करना उचित नहीं होगा। उन्होंने यह संभावना भी उठाई कि नामांकन प्रस्ताव के अधिकार के इस्तेमाल से संबंधित शिकायत के कारण जाँच शुरू हो सकती है।
इसके जवाब में डेमोक्रेटिक पार्टी ने कहा कि राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा संविधान (헌법) के अनुच्छेद 61 के तहत नेशनल असेंबली का अधिकार है। सांसद किम ने दावा किया कि अगर केवल जाँच की संभावना के आधार पर गैरहाज़िरी की अनुमति दी जाए, तो यह तर्क बन सकता है कि शिकायत का सामना कर रहे सरकारी अधिकारी राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा से बच सकते हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी का मानना है कि दोबारा नामांकन के अनुरोध को ठुकराने से नागरिकों के मुकदमा चलाए जाने के अधिकार का उल्लंघन हुआ और 3 दिसंबर के आपातकालीन मार्शल लॉ के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक बुलाने सहित संविधान और कानूनों का उल्लंघन हुआ। ये डेमोक्रेटिक पार्टी के आरोप हैं; उपलब्ध खबरों के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि अवैधता साबित हो चुकी है।
इस खबर का अर्थ
यह टकराव उस बिंदु पर है जहाँ सरकारी अधिकारियों और संस्थाओं की गतिविधियों की जाँच करने की नेशनल असेंबली की राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा की शक्ति और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की रक्षा का सिद्धांत एक-दूसरे से मिलते हैं। विवाद के केंद्र में यह है कि मुख्य न्यायाधीश के नामांकन प्रस्ताव के अधिकार के इस्तेमाल को लेकर नेशनल असेंबली उनसे किस हद तक सवाल पूछ सकती है और संवेदनशील नियुक्ति संबंधी जानकारी या राष्ट्रपति के साथ बातचीत को किस तरह संभाला जाना चाहिए। दोनों पक्ष अलग-अलग संवैधानिक मूल्यों पर ज़ोर दे रहे हैं, इसलिए केवल पेशी की माँग के आधार पर यह तय करना कठिन है कि किस पक्ष का दावा सही है।
यह मुद्दा नागरिकों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा में सरकारी अधिकारियों के स्पष्टीकरण से सार्वजनिक निर्णयों की प्रक्रिया पर नज़र रखी जा सकती है, लेकिन साथ ही यह सवाल भी उठता है कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता को नुकसान से बचाने के लिए गवाही का दायरा और तरीका क्या होना चाहिए। उदाहरण के लिए, यदि नेशनल असेंबली नामांकन प्रक्रिया के घटनाक्रम के बारे में पूछती है, तो नागरिक सार्वजनिक किए जा सकने वाले जवाबों और उम्मीदवारों की निजी जानकारी तथा बातचीत के उन विवरणों में अंतर कर सकते हैं जिन्हें मुख्य न्यायाधीश जो ने सार्वजनिक करना कठिन बताया है। हालाँकि, वास्तविक सवाल और जवाब अभी पुष्ट नहीं हुए हैं।
खबरों में अलग-अलग ढंग से पेश किए गए पहलू
हालाँकि, खबरों का ज़ोर अलग-अलग पहलुओं पर था। एक खबर में सांसद पार्क जी-वॉन की पेशी की माँग—“बस चुपचाप आकर पेश होना चाहिए”—और पूर्व मुख्य न्यायाधीशों के राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा में पेश होने के उदाहरणों पर चर्चा की गई। दूसरी खबर में डेमोक्रेटिक पार्टी और पीपुल पावर पार्टी की एक-दूसरे से विपरीत प्रतिक्रियाएँ साथ में दी गईं। कारण-पत्र पर केंद्रित खबर में नामांकन प्रस्ताव के अधिकार, न्यायिक शक्ति की स्वतंत्रता और जाँच की संभावना समेत मुख्य न्यायाधीश जो द्वारा दिए गए कारणों का विस्तार से वर्णन किया गया।
सांसद पार्क ने दावा किया कि 1960 और 1970 के दशक में पूर्व मुख्य न्यायाधीश मिन बोक-गी और जो जिन-मान राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा में गवाह के रूप में पेश हुए और उन्होंने जवाब दिए; उन्होंने यह भी कहा कि पहले मुख्य न्यायाधीश किम ब्योंग-रो ने भी नेशनल असेंबली के उसी दिन पेश होने के अनुरोध को स्वीकार किया था। उन्होंने कहा कि युद्ध के दौरान शरण लेने की हालत में भी राष्ट्रीय लेखा-परीक्षाएँ, पूर्ण अधिवेशन और स्थायी समितियों की बैठकें हुई थीं और मुख्य न्यायाधीश से पेश होने की माँग की। उन्होंने यह भी दावा किया कि दोबारा नामांकन का मामला, 3 दिसंबर की मार्शल लॉ और विद्रोह की रात वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक, और सुप्रीम कोर्ट के ‘कॉर्पोरेट कार्ड के भुगतान को बाँटने’ का मामला—इनका अलग-अलग मुकदमों से कोई संबंध नहीं है और इन पर केवल मुख्य न्यायाधीश जो ही जवाब दे सकते हैं। ये बातें सांसद पार्क के दावों के रूप में रिपोर्ट की गई हैं।
पुष्ट तथ्य और जो बातें अभी अज्ञात हैं
पुष्ट तथ्य
- 28 सितंबर को विधि एवं न्याय समिति ने डेमोक्रेटिक पार्टी की अगुवाई में मुख्य न्यायाधीश जो को राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा में सामान्य गवाह के रूप में बुलाने का निर्णय लिया।
- मुख्य न्यायाधीश जो ने 4 अक्टूबर को गैरहाज़िरी का कारण बताते हुए पत्र सौंपा और कहा कि 6 अक्टूबर की राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा में पेश होना कठिन है।
- कारण-पत्र में गैरहाज़िरी के कारणों के रूप में नामांकन प्रस्ताव के अधिकार का इस्तेमाल और न्यायपालिका की स्वतंत्रता, संवेदनशील नियुक्ति एवं बातचीत संबंधी जानकारी का सार्वजनिक होना, तथा जाँच की संभावना का उल्लेख किया गया।
- डेमोक्रेटिक पार्टी ने नेशनल असेंबली के निगरानी अधिकार और मुख्य न्यायाधीश जो के पहले के बयान का हवाला देकर उनकी पेशी की माँग की, जबकि पीपुल पावर पार्टी ने डेमोक्रेटिक पार्टी के दबाव की आलोचना की।
जो बातें अभी अज्ञात हैं
- उपलब्ध खबरों में यह नहीं बताया गया है कि मुख्य न्यायाधीश जो बाद में राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा में वास्तव में पेश हुए या नहीं।
- डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा लगाए गए आरोपों पर किस प्रक्रिया के तहत फैसला होगा और उसका नतीजा क्या होगा, यह केवल इस खबर से पता नहीं चलता।
पाठकों को किन बातों की पुष्टि करनी चाहिए
- यह पुष्टि करना ज़रूरी है कि 6 अक्टूबर की राष्ट्रीय लेखा-परीक्षा में मुख्य न्यायाधीश जो पेश हुए या नहीं और विधि एवं न्याय समिति ने वास्तव में किस तरीके से सवाल पूछे।
- आगे की खबरों में कारण-पत्र में दिए गए तर्कों और नेशनल असेंबली की ओर से दिए गए जवाबों को अलग-अलग देखकर यह अधिक स्पष्ट हो सकता है कि विवाद का मुद्दा केवल पेशी है या नामांकन प्रस्ताव के अधिकार से जुड़ी गवाही का दायरा।
- डेमोक्रेटिक पार्टी द्वारा लगाए गए संविधान और कानूनों के उल्लंघन के आरोपों की जाँच करते समय पार्टी के दावों और पुष्ट निष्कर्षों के बीच अंतर करना चाहिए।
संदर्भ
- संदर्भित अन्य रिपोर्ट: hani.co.kr
- संदर्भित अन्य रिपोर्ट: hani.co.kr




















