न्यूज़ीलैंड के आम चुनाव से एक महीने पहले जनमत सर्वेक्षणों के नतीजे अलग-अलग रहे। 24 सितंबर से 1 अक्टूबर तक मतदान के योग्य 1,000 मतदाताओं के बीच RNZ के लिए किए गए रीड रिसर्च सर्वेक्षण में लेबर पार्टी, ग्रीन पार्टी और ते पाती माओरी का संयुक्त समर्थन नेशनल पार्टी, न्यूज़ीलैंड फर्स्ट और ACT से 2.1 प्रतिशत अंक अधिक था। हालांकि, 1 से 5 अक्टूबर तक 1,001 लोगों के बीच TVNZ 1News के लिए किए गए वेरियन सर्वेक्षण में नेशनल पार्टी, लेबर पार्टी से 1 प्रतिशत अंक आगे थी। दोनों सर्वेक्षणों में ऑपर्च्युनिटी ने संसद में प्रवेश की सीमा पार कर ली।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
रीड रिसर्च सर्वेक्षण में लेबर पार्टी का समर्थन 30.8% रहा, जो अगस्त के मध्य में हुए सर्वेक्षण से 1.8 प्रतिशत अंक कम था। नेशनल पार्टी का समर्थन 25.9% रहा, जो 3.2 प्रतिशत अंक की गिरावट थी। इसके विपरीत, ग्रीन पार्टी का समर्थन 14.8% रहा, जो 4.6 प्रतिशत अंक बढ़ा। न्यूज़ीलैंड फर्स्ट का समर्थन 10.6% रहा, जो 1.3 प्रतिशत अंक कम था, जबकि ACT का समर्थन 9.0% रहा, जो 1.3 प्रतिशत अंक बढ़ा।
ऑपर्च्युनिटी का समर्थन 5.5% रहा, जो 0.2 प्रतिशत अंक बढ़ा, जबकि ते पाती माओरी का समर्थन 2.0% रहा, जो 1.0 प्रतिशत अंक घटा। रीड रिसर्च के सर्वेक्षण में वामपंथी दल पहली बार दक्षिणपंथी दलों से आगे रहे। इससे पहले पिछले सर्वेक्षण में दक्षिणपंथी दल 3.3 प्रतिशत अंक आगे थे। लेख के अनुसार, जून के मध्य में हुए वेरियन सर्वेक्षण के बाद यह पहली बार भी था कि वामपंथी दल आगे रहे।
वेरियन सर्वेक्षण में नेशनल पार्टी को 29% और लेबर पार्टी को 28% समर्थन मिला। ग्रीन पार्टी को 16%, न्यूज़ीलैंड फर्स्ट को 10%, ACT को 9%, ऑपर्च्युनिटी को 7% और ते पाती माओरी को 0.6% मिला। पिछले वेरियन सर्वेक्षण की तुलना में नेशनल पार्टी का समर्थन 1 प्रतिशत अंक बढ़ा, और न्यूज़ीलैंड फर्स्ट तथा ऑपर्च्युनिटी का समर्थन भी 1-1 प्रतिशत अंक बढ़ा। ACT का समर्थन 2 प्रतिशत अंक गिरा। लेबर पार्टी और ग्रीन पार्टी के समर्थन में कोई बदलाव नहीं हुआ।
नतीजों को समझते समय सर्वेक्षणों के अलग-अलग समय पर किए जाने को भी ध्यान में रखना चाहिए। 31 अगस्त से 27 सितंबर तक किए गए रॉय मॉर्गन सर्वेक्षण में दक्षिणपंथी खेमे को वामपंथी खेमे से 10.5 प्रतिशत अंक आगे दिखाया गया। हालांकि, सर्वेक्षण की अधिकांश अवधि हाल के वेरियन और रीड रिसर्च सर्वेक्षणों से पहले की थी। इसलिए अलग-अलग सर्वेक्षणों के आंकड़ों की तुलना ऐसे करना मुश्किल है, मानो वे एक ही समय के चुनावी रुझान दिखाते हों।
इस खबर का मतलब
ऑपर्च्युनिटी ऐसा दल है जो किसी भी खेमे के साथ जुड़ा नहीं है। लेख के अनुसार, उसे दलगत वोटों का 5% वाला मानदंड थोड़ा पार करने का समर्थन मिला। सर्वेक्षणों के नतीजे अगर चुनाव के दिन भी ऐसे ही रहे, तो ऑपर्च्युनिटी वाम और दक्षिणपंथी खेमों के बीच सत्ता का संतुलन तय कर सकती है—इस विश्लेषण की पृष्ठभूमि यही है। हालांकि, यह इस संभावना पर आधारित है कि जनमत सर्वेक्षण वास्तविक वोटों और सीटों में बदलेंगे; इसका अर्थ यह नहीं है कि चुनाव के बाद गठबंधन सरकार में शामिल होने का फैसला हो चुका है।
गठबंधन सरकार वह होती है जिसे कई दल मिलकर बनाते हैं। जब ऑपर्च्युनिटी का समर्थन तय सीमा से ऊपर हो, तो किसी भी खेमे के लिए सीटें हासिल करने के वास्ते इस दल का चुनाव अहम हो सकता है। उदाहरण के लिए, अगर चुनाव के नतीजों में कोई एक खेमा अकेले सरकार बनाने की स्थिति में न हो, तो ऑपर्च्युनिटी का साथ देने या न देने का फैसला सरकार गठन की चर्चा को प्रभावित कर सकता है। वास्तविक नतीजे और सहयोगी दल का पता अभी नहीं है।
सर्वेक्षण में दलों के नेताओं के बारे में लोगों की राय भी शामिल थी। प्रधानमंत्री और नेशनल पार्टी के नेता क्रिस्टोफर लक्सन की शुद्ध लोकप्रियता (सकारात्मक राय के प्रतिशत में से नकारात्मक राय का प्रतिशत घटाकर निकाला गया आंकड़ा) –23.7 थी। 53.3% उत्तरदाताओं ने उनके कामकाज को नकारात्मक और 29.6% ने सकारात्मक आंका। लेबर पार्टी के नेता क्रिस हिपकिंस की शुद्ध लोकप्रियता –3.6 थी; 38.7% लोगों ने उनके बारे में नकारात्मक और 35.1% ने सकारात्मक राय दी।
ऑपर्च्युनिटी को लेकर विवाद दिखाता है कि नीतिगत मुद्दे और गठबंधन की संभावना एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लक्सन ने ऑपर्च्युनिटी की भूमि कर नीति का हवाला देते हुए कहा कि वह इस दल के साथ सहयोग नहीं करेंगे। वेरियन सर्वेक्षण में 40% उत्तरदाताओं ने कहा कि नेशनल पार्टी को इस रुख पर फिर से विचार करना चाहिए, जबकि 33% ने कहा कि उसे ऐसा नहीं करना चाहिए। ये सर्वेक्षण में शामिल लोगों की राय है; इसका मतलब यह नहीं है कि नेशनल पार्टी का रुख बदल गया है।
ते पाती माओरी के सीटें जीतने की संभावना भी खेमों के बीच सीटों के हिसाब को जटिल बना सकती है। लेख के अनुसार, अगर यह दल लगभग 1% दलगत वोट पाकर सात माओरी निर्वाचन क्षेत्रों में से पांच में जीतता है, तो चार अतिरिक्त सीटें बन सकती हैं। इस स्थिति में संसद की कुल सीटें औपचारिक रूप से 120 से बढ़कर 124 हो जाएंगी और ते पाती माओरी पांच सीटें हासिल करेगा, जिससे वामपंथी खेमे को मदद मिल सकती है। यह भी चुनाव के एक खास नतीजे को मानकर बनाया गया परिदृश्य है।
अलग-अलग खबरों में किन बातों का वर्णन अलग था
हाल के दोनों सर्वेक्षणों में दलों के समर्थन और दोनों खेमों के रुझान अलग-अलग दिखे। रीड रिसर्च सर्वेक्षण में वामपंथी दलों का संयुक्त समर्थन दक्षिणपंथी दलों से 2.1 प्रतिशत अंक अधिक था, जबकि वेरियन सर्वेक्षण में नेशनल पार्टी, लेबर पार्टी से 1 प्रतिशत अंक आगे थी। ऑपर्च्युनिटी का समर्थन भी रीड रिसर्च सर्वेक्षण में 5.5% और वेरियन में 7% था।
सर्वेक्षणों के नतीजे अलग होने भर से यह तय नहीं किया जा सकता कि उनमें से कोई एक गलत है। उनके सर्वेक्षण काल और नमूने अलग-अलग हैं, और उपलब्ध सामग्री में किसी भी जनमत सर्वेक्षण की त्रुटि-सीमा नहीं दी गई है। रॉय मॉर्गन सर्वेक्षण में दक्षिणपंथी खेमे को 10.5 प्रतिशत अंक आगे दिखाया गया, लेकिन यह भी ध्यान रखना चाहिए कि सर्वेक्षण की अधिकांश अवधि हाल के दोनों सर्वेक्षणों से पहले की थी।
पुष्ट तथ्य और जो अभी अज्ञात है
पुष्ट तथ्य
- रीड रिसर्च सर्वेक्षण में वामपंथी दलों का संयुक्त समर्थन दक्षिणपंथी दलों के संयुक्त समर्थन से 2.1 प्रतिशत अंक अधिक था।
- वेरियन सर्वेक्षण में नेशनल पार्टी को 29%, लेबर पार्टी को 28% और ऑपर्च्युनिटी को 7% समर्थन मिला।
- दोनों सर्वेक्षणों में ऑपर्च्युनिटी ने संसद में प्रवेश के 5% वाले मानदंड को पार किया।
- लक्सन ने भूमि कर नीति का हवाला देते हुए कहा कि वह ऑपर्च्युनिटी के साथ सहयोग नहीं करेंगे।
जो अभी अज्ञात है
- 7 नवंबर के आम चुनाव में प्रत्येक दल को वास्तव में कितने वोट और सीटें मिलेंगी, यह अभी पता नहीं है।
- चुनाव के बाद ऑपर्च्युनिटी किस खेमे के साथ गठबंधन सरकार बनाएगी या सहयोग करेगी, यह भी तय नहीं है।
- लेख में बताए गए जनमत सर्वेक्षणों की त्रुटि-सीमा सामग्री में नहीं दी गई है।
पाठकों को किन बातों पर ध्यान देना चाहिए
- आगे जारी होने वाले जनमत सर्वेक्षणों के लिए सर्वेक्षण संस्था और सर्वेक्षण अवधि, दोनों की जांच करें। अलग-अलग समय के नतीजों की सीधे तुलना करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
- केवल मौजूदा समर्थन के आधार पर यह तय नहीं किया जा सकता कि ऑपर्च्युनिटी किसके साथ सहयोग करेगी। चुनाव के बाद संबंधित दलों के आधिकारिक रुख और सरकार गठन की चर्चा पर नजर रखनी चाहिए।
- ते पाती माओरी निर्वाचन क्षेत्रों में कितनी सीटें जीतता है, इससे सीटों का समीकरण बदल सकता है। इसलिए आम चुनाव के बाद दलगत वोटों के अलावा निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों और सीटों की अंतिम संख्या पर भी ध्यान देना चाहिए।
संदर्भ
- संदर्भित अन्य रिपोर्ट: theconversation.com




















