मॉस्को के ट्रैफ़िक जाम, सड़क पर होने वाले कार्यक्रमों और कला संग्रहालय के सामने खड़े विद्यार्थियों के बीच युद्ध कभी भर्ती के विज्ञापन के रूप में क्षण भर के लिए दिखाई देता और फिर ओझल हो जाता था। उनका लेख रूस और दक्षिण कोरिया के संबंधों में आए बदलाव को कोरियाई प्रायद्वीप की कूटनीति से जोड़ता है और उत्तर तथा दक्षिण कोरिया के बीच संवाद की ज़रूरत उठाता है।
पृष्ठभूमि और संदर्भ
किम यॉन-चोल ने लिखा कि मॉस्को जाते समय उन्होंने लियो टॉल्स्टॉय का उपन्यास 《युद्ध और शांति》 पढ़ा। उपन्यास में युद्ध और व्यक्ति के जीवन को याद करते हुए, उन्होंने बताया कि मॉस्को में उनका सामना ऐसे दृश्यों से हुआ जहाँ युद्ध और रोज़मर्रा की ज़िंदगी असहज रूप से साथ-साथ मौजूद थे। सड़क पर लगे डिजिटल विज्ञापन-पटल पर भर्ती का विज्ञापन क्षण भर के लिए दिखना उनके इस अवलोकन का प्रतीक था कि शहर के दृश्य में युद्ध आसानी से नज़र नहीं भी आ सकता है।
उनके वर्णन में मॉस्को में ट्रैफ़िक जाम, तेज़ आवाज़ करते हुए दौड़ते मोटरसाइकिल सवारों के समूह, कला संग्रहालय के सामने छोटे विद्यार्थी और आर्बात सड़क पर गायक के सामने नाचते युवा प्रेमी थे। दूसरी ओर, लेख में यह अफ़वाह भी बताई गई कि यूक्रेन द्वारा मॉस्को के दक्षिण में स्थित एक तेलशोधन केंद्र पर ड्रोन से बमबारी किए जाने के बाद पेट्रोल पंपों पर कतारें लंबी हो गई थीं। इस अफ़वाह से कतारों के आकार या ईंधन की वास्तविक आपूर्ति पर पड़े असर की पुष्टि नहीं होती।
किम यॉन-चोल ने लिखा कि रक्षा व्यय के कारण रूस का राजकोषीय घाटा (वह स्थिति जिसमें सरकारी खर्च आय से अधिक हो) और राष्ट्रीय ऋण बढ़े, और राजस्व की कमी पूरी करने के लिए विभिन्न कर बढ़ाए गए। उन्होंने बताया कि आर्थिक मंदी के कारण रेस्तराँ खाली थे और हवाई अड्डे पर प्रवेश तथा निकास की प्रक्रियाओं में समय लगता था और वे कठिन थीं। ये मॉस्को में लेख के लेखक द्वारा देखे और सुने गए दृश्य तथा उनके आकलन हैं; इन्हें हर आर्थिक स्थिति के पैमाने या कारणों की स्वतंत्र पुष्टि करने वाले आँकड़ों के रूप में प्रस्तुत नहीं किया गया है।
लेख का मुख्य तर्क है कि कूटनीतिक संदर्भ भी बदल चुका है। किम यॉन-चोल ने 2005 के 19 सितंबर के संयुक्त वक्तव्य (9·19 공동성명) के बाद उस पूर्वोत्तर एशियाई बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग कार्यसमूह (동북아 다자 안보협력 워킹그룹) का उल्लेख किया, जिसकी अध्यक्षता रूस करता था। साथ ही, उन्होंने लिखा कि रूस के नेतृत्व वाला मौजूदा यूरेशियाई सुरक्षा सहयोग तंत्र बदली हुई परिस्थितियों को दर्शाता है। उनका आकलन है कि चीन-जापान, रूस-जापान और उत्तर-दक्षिण कोरिया के संबंध बिगड़ने से पूर्वोत्तर एशिया में साझा सुरक्षा की संभावनाएँ दूर होती गई हैं।
इस ख़बर का अर्थ
किम यॉन-चोल उत्तर कोरिया, चीन और रूस के संबंधों को वैचारिक एकजुटता के बजाय देशों के हितों के मेल पर आधारित बताते हैं। उनका विश्लेषण है कि मौजूदा यूरेशियाई सुरक्षा सहयोग भी उत्तरी देशों के हितों के एक साथ आने का नतीजा है और अलग-अलग हित उभरने पर यह बदल सकता है। इसलिए, इस सहयोग के जारी रहने को समझने के लिए केवल वैचारिक नारों पर नहीं, बल्कि इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि देशों के हित किस तरह एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
दक्षिण कोरिया और रूस के संबंधों के बारे में उन्होंने लिखा कि दक्षिण कोरिया के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने के बाद रूस ने उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच संतुलित कूटनीति बनाए रखी थी। लेकिन रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दक्षिण कोरिया के प्रतिबंधों में शामिल होने से रूस को दक्षिण कोरिया से हासिल होने वाले लाभ बहुत कम रह गए। किम यॉन-चोल ने बताया कि रूस दक्षिण कोरिया द्वारा प्रतिबंधों का पालन करने को समझता है, लेकिन प्रतिबंधों से बाहर के क्षेत्रों में उसकी निष्क्रियता को समझना कठिन मानता है। यह लेख में प्रस्तुत रूस का नज़रिया है; इसे संबंधों के हर मुद्दे को समेटने वाला आधिकारिक समझौता या दोनों देशों की समग्र स्थिति नहीं माना जा सकता।
लेख जिस समाधान पर ज़ोर देता है, वह है—संबंध खराब होने पर भी संवाद जारी रखना। किम यॉन-चोल ने चिंता जताई कि युद्ध समाप्त होने पर भी स्थितियाँ अपने-आप युद्ध से पहले जैसी नहीं हो जातीं और संवाद का लंबे समय तक अभाव रहने पर दुश्मनी एक स्थायी ढाँचे में बदल सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि उत्तरी क्षेत्र के विशेषज्ञों ने ज़ोर दिया कि उत्तर-दक्षिण संबंध दोनों पक्षों का मामला हैं, इसलिए किसी तीसरे पक्ष के लिए हस्तक्षेप करना कठिन है। उनका निष्कर्ष है कि बहुपक्षीय सहयोग तभी संभव है जब उत्तर और दक्षिण कोरिया के द्विपक्षीय संबंधों की समस्याएँ सुलझें।
मसलन, अगर उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच सीधे संवाद में कठिनाई हो, तो लेख के तर्क के अनुसार पड़ोसी देशों की भूमिका अकेले द्विपक्षीय संबंधों की समस्याओं को हल नहीं कर सकती। इसका अर्थ यह नहीं कि तीसरे देशों के साथ कूटनीति अनावश्यक है; इसे इस दावे के रूप में समझा जा सकता है कि पड़ोसी देशों के सहयोग पर ही निर्भर रहने के बजाय उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध सुधारने वाले संवाद पर भी ध्यान देना चाहिए।
इसी संदर्भ में लेख असैन्यीकृत क्षेत्र में बारूदी सुरंग की घटना को शांति से जुड़ा एक काम मानता है। किम यॉन-चोल ने घटना में घायल सैनिकों के दर्द के प्रति सहानुभूति जताई और कहा कि घटना की सच्चाई का ठीक-ठीक पता लगाकर उसकी पुनरावृत्ति रोकने के उपाय तलाशने चाहिए। एक अलग ख़बर ने पिछले महीने की 21 तारीख को हुई बारूदी सुरंग विस्फोट की घटना पर दक्षिण कोरिया की माफ़ी और बातचीत की मांग को उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रक्षेपण अभ्यास से ख़ारिज किए जाने के रूप में समझाया। उस ख़बर के अनुसार, उत्तर कोरिया ने परमाणु युद्ध-निरोधक क्षमता को मज़बूत करने की बात कही, जबकि रक्षा मंत्रालय (국방부) ने कहा कि बैलिस्टिक मिसाइल का प्रक्षेपण संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (유엔 안전보장이사회) के प्रस्तावों का उल्लंघन करने वाली गंभीर कार्रवाई है और तनाव बढ़ाने वाले कदम रोकने की मांग की।
अलग-अलग ख़बरों में अलग विवरण
मिसाइल की उड़ान-दूरी रिपोर्टों में उद्धृत विभिन्न पक्षों के अनुसार अलग-अलग है। उत्तर कोरिया के रोडोंग सिनमुन (노동신문) ने बताया कि मिसाइल ने पूर्वी सागर के ऊपर 1,000 किलोमीटर दूर निर्धारित लक्ष्य-बिंदु को निशाना बनाया। दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ (합동참모본부) ने घोषणा की कि मिसाइल ने 700 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की, जबकि जापान के रक्षा मंत्रालय (일본 방위성) ने अनुमान लगाया कि उसने 680 किलोमीटर की उड़ान भरी। यह संभावना जताई गई कि उत्तर कोरिया द्वारा दागी गई मिसाइल ‘ह्वासोंग-16ना’ हाइपरसोनिक मिसाइल थी, लेकिन उस ख़बर ने भी मिसाइल के प्रकार को निश्चित नहीं बताया।
दोनों लेखों का केंद्र भी अलग है। लेख मॉस्को की रोज़मर्रा की ज़िंदगी, रूस के विदेशी संबंधों और उत्तर-दक्षिण संवाद के बारे में लेखक के विश्लेषण पर केंद्रित है। मिसाइल संबंधी ख़बर प्रक्षेपण अभ्यास और उत्तर कोरिया, दक्षिण कोरिया तथा जापान की घोषणाओं की जानकारी देती है; उसमें बारूदी सुरंग की घटना पर माफ़ी और बातचीत की मांग को सैन्य शक्ति के प्रदर्शन से ख़ारिज किए जाने के रूप में समझाया गया। दोनों लेख एक ही घटना का खंडन नहीं करते; उनका केंद्र अलग है—एक ओर बारूदी सुरंग की घटना को शांति और कूटनीति से जुड़ा मुद्दा मानने वाला लेख है, और दूसरी ओर उस दिन की सैन्य प्रतिक्रिया बताने वाली ख़बर।
पुष्ट तथ्य और वे बातें जो अभी अज्ञात हैं
पुष्ट तथ्य
- किम यॉन-चोल ने मॉस्को में युद्ध और रोज़मर्रा की ज़िंदगी के साथ-साथ मौजूद रहने का वर्णन किया और अपने लेख में रूस की अर्थव्यवस्था तथा जीवन पर युद्ध के असर पर चर्चा की।
- लेख में कहा गया कि रूस ने दक्षिण कोरिया के साथ राजनयिक संबंध स्थापित करने के बाद उत्तर और दक्षिण कोरिया के बीच संतुलित कूटनीति बनाए रखी थी और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद दक्षिण कोरिया के प्रतिबंधों में शामिल होने से रूस को दक्षिण कोरिया से हासिल होने वाले लाभ बहुत कम रह गए।
- एक अलग ख़बर के अनुसार, उत्तर कोरिया ने 3 तारीख़ को तड़के मिसाइल प्रक्षेपण अभ्यास किया और राज्य मामलों के आयोग के अध्यक्ष किम जोंग-उन ने इसे देखा। उत्तर कोरिया की घोषणा और दक्षिण कोरिया तथा जापान द्वारा उड़ान-दूरी के विश्लेषण अलग-अलग थे।
- किम यॉन-चोल ने कहा कि असैन्यीकृत क्षेत्र में बारूदी सुरंग की घटना की सच्चाई का पता लगाया जाना चाहिए और उसकी पुनरावृत्ति रोकने के उपाय तैयार किए जाने चाहिए।
वे बातें जो अभी अज्ञात हैं
- मॉस्को के दक्षिण में स्थित तेलशोधन केंद्र पर ड्रोन हमले की सटीक तारीख़ और नुकसान का पैमाना मूल लेख में नहीं दिया गया है।
- पेट्रोल पंपों पर कतारें लंबी होने की अफ़वाह का आधार और ईंधन की वास्तविक आपूर्ति पर उसका असर पुष्ट नहीं है।
- असैन्यीकृत क्षेत्र में बारूदी सुरंग की घटना का सटीक समय और घटनाक्रम लेख तथा मिसाइल संबंधी ख़बर में पर्याप्त रूप से नहीं बताया गया है।
पाठकों को किन बातों की जाँच करनी चाहिए
- तेलशोधन केंद्र पर हमले और पेट्रोल पंपों पर कतारें लंबी होने की बात लेख में अफ़वाह के रूप में दी गई है। आगे की ख़बरें देखते समय यह जाँचना ज़रूरी है कि हमले की तारीख़, नुकसान का पैमाना और आपूर्ति पर वास्तविक असर की अलग से पुष्टि हुई है या नहीं।
- मिसाइल की उड़ान-दूरी के बारे में उत्तर कोरिया की घोषणा, दक्षिण कोरिया के जॉइंट चीफ़्स ऑफ़ स्टाफ़ की घोषणा और जापान के रक्षा मंत्रालय का विश्लेषण अलग-अलग हैं। किसी एक आँकड़े को ही पुष्ट तथ्य मानने के बजाय घोषणा करने वाले पक्ष और उसके शब्दों को साथ में देखना चाहिए।
- असैन्यीकृत क्षेत्र में बारूदी सुरंग की घटना के लिए घटनाक्रम, सच्चाई का पता लगाना और पुनरावृत्ति रोकने के उपाय स्पष्ट होने चाहिए। लेख की मांग और उत्तर कोरिया के मिसाइल प्रक्षेपण की ख़बर को अलग रखते हुए यह देखना महत्वपूर्ण है कि क्या घटना के बारे में आगे कोई स्पष्टीकरण आया है।
संदर्भ
- संदर्भित अन्य रिपोर्ट: hani.co.kr




















